दो हजार के नोट को लेकर तरह-तरह के भ्रामक शिगूफे सोशल मीडिया पर वायरल किए जा रहे हैं। पहले मोदी एप के जरिए नोट में चिप होने की अफवाह फैलाई गई। अब दो हजार की करेंसी से बल्ब जलाने का दूसरा भ्रम फैला दिया गया।
गुरुवार को तो एक चैनल के संवाददाता इसकी तसदीक के लिए बीएचयू आईआईटी के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. प्रभाकर सिंह के पास पहुंच गए और इस आशय की खबर भी चला दी। हालांकि नोट में चिप होने से बल्ब जलाने को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल दावे को आईआईटी बीएचयू ने सिरे से खारिज किया है।
आईआईटी बीएचयू के एप्लाइड फिजिक्स के डॉ. प्रभाकर सिंह का कहना है कि दो हजार की नई करेंसी में किसी भी तरह सौर ऊर्जा को स्टोर नहीं किया जा सकता। स्टोरेज सिस्टम के लिए कैपेसिटर और डायलेटिक मेटल का होना जरूरी है जो कि करेंसी में संभव नहीं है।
डॉ. प्रभाकर सिंह का कहना है कि करेंसी में हरी दिखने वाली पट्टी में नोबल मेटल का इस्तेमाल किया जाता है और इस मेटल में किसी भी तरह की ऊर्जा को स्टोर नहीं किया जा सकता।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में यह दिखाया जा रहा है कि नोट को पहले सूरज की रोशनी में रखा गया। उसके बाद कमरे के अंदर लेकर जाकर तारों के जरिये उससे 50 से 60 वॉट का बल्ब जलाया गया। ये संभव इसलिए नहीं है कि तीस सेकंड के सोलर पावर से 60 वॉट का बल्ब जल पाए।