अधिकमास का प्रभाव 19 मार्च से शुरू होगा। मकर संक्रांति 14 जनवरी को है। जनवरी में तीन को माघी पूर्णिमा, छह को गणेश चतुर्थी, 18 को मौनी अमवस्या, 23 को वसंत पंचमी, फरवरी में एक को संत रविदास जयंती, तीन को सबे बरात, 15 को महाशिवरात्रि, 27 को रंगभरी एकादशी, 28 को मशाने की होली, मार्च में दो को होलिका दहन, चार को होली, 19 को चैत्र नवरात्र, 27 को रामनवमी, 31 को महावीर जयंती, अप्रैल गुड फ्राइडे, 20 को अक्षय तृतीया, 16 को बट सावित्री व्रत, 26 को गंगा दशहरा, 28 को बकरीद, जून में 26 को मुहर्रम, अगस्त में चार को चेहल्लुम, 17 को नागपंचमी, 26 को बरावफात, 28 को रक्षाबंधन, 31 को कजरी, सितंबर में दो को ललही छठ, चार को श्रीकृष्णजन्माष्टमी, 17 को हरितालिका तीज, 17 को लोलार्क छठ, 27 से पितृपक्ष, अक्तूबर में तीन को जिउतिया, 20 को विजयदशमी, 29 को करवाचौथ, नवंबर में छह को धनतेरस व नरकचतुर्दशी, आठ को दिवाली, नौ को गोवर्धन पूजा, 10 को भइयादूज पड़ेगा।
ज्योतिषीय गणना में पुरुषोत्तम मास चक्र चलते रहे। इसमें हर तीन साल पर एक मास पर अधिकमास का आता है, जो दो महीने का पड़ता है। अगले 11 साल यानी 2037 में दोबारा ज्येष्ठ मास आएगा। जबकि पिछले करीब 40 वर्षों में 1988, 1999, 2007, 2017 ज्येष्ठ मास दो माह का पड़ चुका है। अगला अधिकमास 2029 में चैत्र मास, 2031 तक भाद्र मास, 2034 में आषाढ़ पर होगा।
प्रो. नागेंद्र पांडेय ने बताया कि नए साल के राजा गुरु बृहस्पति और मंत्री मंगल होंगे। यह साल रौद्र नामक वर्ष के रूप में होगा। लेकिन, राजा के गुरु बृहस्पति के होने से उथल-पुथल के बीच समन्वय बना रहेगा। इस वर्ष का मिथुन, कर्क, कन्या व धनु राशि के लिए काफी फलदायी है। बाकी राशियों को थोड़ा कष्ट रहेगा। अधिकमास में कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है। प्रो. नागेंद्र पांडेय ने बताया कि अधिकमास वाले माह में कोई मंगल कार्य नहीं होते हैं। इस मास में यज्ञ, जप व तीर्थों में स्नान के फल मिलते हैं। भगवान शिव का अभिषेक, रुद्राभिषेक व पूजन काफी फलदायी होता है।