जेल में बंद आरएस यादव की ब्लैक मनी को व्हाइट करने में उनके सीए एसके द्विवेदी की भूमिका को जांच एजेंसियां बेहद अहम मान रही हैं। जांच एजेंसियों की मानें तो सीए के इशारे पर ही अलग-अलग संपत्तियों और कंपनियों में ब्लैक मनी खपाई गई। सीए की मदद से ही यादव ने चार बोगस कंपनियां बनाई थीं।
इनमें तीन कंपनियां पश्चिम बंगाल और एक कानपुर में रजिस्टर्ड है। कंपनियों के जरिए ही अरबों की काली कमाई को सफेद किया जाता था। इन कंपनियों में बेटे, बेटी, भाई, चालक और रिश्तेदारों के अलावा खुद द्विवेदी भी शेयर होल्डर हैं।
कंपनी का कारोबार भले ही वाराणसी में रहा हो लेकिन निदेशकगण आयकर रिटर्न पश्चिम बंगाल में भरते थे। रिटर्न के कागजात भी ईडी ने अपने कब्जे में लिए हैं। यादव की ऑरबिट विनमय प्राइवेट लिमिटेड कंपनी, सुपीरियर निर्माण प्राइवेट लिमिटेड कंपनी और क्रिस्टल अपार्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का पता चल सका है।
द्विवेदी ने कंपनी में आठ हजार शेयर खरीदे
ऑरबिट विनमय प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के निदेशक यादव के बेटे अपूर्व यादव और महेंद्र प्रताप मौर्या हैं। 2006 में ये कंपनी शुरू हुई। आरएस के भाई ब्रह्मदेव यादव, प्रेमचंद यादव, बेटे अपूर्व यादव समेत 19 लोगों ने शेयर खरीदे है। एक शेयर की कीमत दस रुपये है।
ब्रह्मदेव ने 21750, प्र्रेमचंद ने 21750, अपूर्व ने 33750, गंगोत्री देवी ने 19000, बेटी पूनम यादव ने 18000, जेपीएन राज ने 18000, दुर्गा राज ने 15000, लभेश्वरी मर्चेंडाइज प्राइवेट लिमिटेड ने 19000, प्रेमचंद यादव ने 20750, ब्रह्मदेव यादव ने 21250, द्विवेदी कसल्टेंसी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड ने 8000, कृष्णा डीलर्स प्राइवेट लिमिटेड ने 10000, कुदरत मर्चेंट्स प्राइवेट लिमिटेड ने 10000, मिलन टाई यूपी प्राइवेट लिमिटेड ने 10000, नंदन वनिजय प्राइवेट लिमिटेड ने 10000, आरएनजी ने 10000, ग्रोव सप्लायर्स ने 10000, ग्रांट सप्लायर्स ने 30000, ग्लेज कंस्ट्रक्शन ने 10000 और यूनिटी डिस्ट्रीब्यूटर्स ने 20000 शेयर खरीदे हैं। इस तरह कुल मिलाकर 336250 शेयरों की खरीदे गए।