वाराणसी। लघु उद्योग भारती संगठन काशी प्रांत की बैठक रविवार को लोहता स्थित कोटवा में बुनकर व हस्त शिल्पियों के साथ हुई। इसमें बुनकरों व हस्त शिल्पियों ने पावरलूम से हो रही क्षति पर चर्चा की। बुनकरों ने कहा कि काशी के हथकरघा द्वारा वस्त्र निर्माण का इतिहास वर्षों पुराना है।
भगवान श्रीराम के जन्म व विवाह, भगवान बुद्ध के जन्म व मृत्यु के समय काशी के बने वस्त्रों का उपयोग हुआ था। संत कबीर द्वारा हथकरघा व वस्त्र निर्माण का विवरण इतिहास के पन्नों में सुरक्षित है। लेकिन हमारे पूर्वजों की इस थाती हस्तकरघा को पावरलूम ने नष्ट करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। काशी प्रांत के अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह ने कहा कि असली बनारसी साड़ी हथकरघा से ही बनी होती है, जिसको जीआई मार्क भी प्राप्त है। पावरलूम से तो सूरत, चीन या दुनिया के किसी भी कोने में साड़ी बनाई जा सकती है। लेकिन वह कभी भी बनारसी साड़ी नहीं होगी। संगठन के बुनकर सदस्य सर्वेश श्रीवास्तव ने कहा कि बनारस की असली पहचान हथकरघा है। बुनकर गोपाल पटेल ने बताया कि बनारस का हथकरघा वस्त्र उद्योग जो कि कुटीर उद्योग की श्रेणी में आता है। बैठक में बुनकर मुबारक अली, नूरुद्दीन, करीम, सलीम, मकसूद, गोपाल पटेल, रामदास आदि मौजूद रहे।