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Varanasi News: 200 साल पुराने दालमंडी के मुसाफिर खाने पर चला बुलडोजर, मैरिज हॉल और किचन तोड़ा

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दालमंडी चौड़ीकरण में तोड़े जा रहे मुसाफिरखाना । स्रोत वीडियो ग्रेब
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वाराणसी। दालमंडी में सोमवार को पीडब्ल्यूडी की टीम ने बड़ी कार्रवाई की। करीब 200 साल पुराने मुसाफिर खाने पर बुलडोजर चला। सड़क से करीब 20 फुट तक के हिस्से को तोड़ दिया गया। इसमें मैरिज हॉल और किचन को ध्वस्त किया गया। ऊपर से पहले फ्लोर का हिस्सा तोड़ा गया है। अब बाकी हिस्से को हथौड़े की मदद से तोड़ने का काम जारी रहेगा। अभी इससे सटी तीन दुकानें भी तोड़ी जाएंगी और मुख्य गेट पर भी बुलडोजर चलेगा।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर में पूजन किया। उनके जाने के बाद दोपहर करीब दो बजे से पीडब्ल्यूडी की टीम ने दालमंडी में कार्रवाई शुरू कर दी। सोमवार को कुछ भवनों से मलबा हटाने का काम किया गया, लेकिन मुख्य रूप से मुसाफिर खाने पर कार्रवाई की गई। मंगलवार को भी इसे तोड़ने का काम जारी रहेगा। कार्रवाई के दौरान क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात रहा और पूरे इलाके की निगरानी की गई। एसीपी दशाश्वमेध अतुल अंजन त्रिपाठी ने बताया कि सभी प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद मुसाफिर खाने के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई। मंगलवार को करीब 20 भवनों को तोड़ा जाएगा।
मुसाफिर खाने में 65 कमरे, 106 अलमारियां और आठ बेड का एक हॉल

पूर्व पार्षद शाहिद अली मुन्ना ने बताया कि मुसाफिर खाना करीब 200 साल पहले बनवाया गया था। उस समय बाजार में आने वाले व्यापारियों और मुसाफिरों के ठहरने के लिए इसका निर्माण कराया गया था। इसे हाजी जब्बार, हाजी लाल मोहम्मद, हाजी सिराजुद्दीन समेत आठ लोगों ने बनवाया था। मौजूदा समय में हाजी जासुद्दीन इसके सचिव हैं। पूरे मुसाफिर खाने में 65 कमरे, 106 अलमारियां और आठ बेड का एक हॉल है। इसकी कुल गहराई 130 फुट है। इसमें करीब 22 फुट आगे से तोड़ा जाना है। भवन में एक अंडरग्राउंड पार्किंग भी है। ग्राउंड फ्लोर पर 21 कमरे और 20 शौचालय हैं। पहले फ्लोर पर 21 कमरे और दूसरे फ्लोर पर भी 21 कमरे हैं। परिसर में एक मस्जिद भी है, जहां पांचों वक्त नमाज होती है।
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सराय एक्ट के तहत हुआ पंजीकरण
स्थानीय लोगों ने बताया कि वर्ष 1938 में इसका पंजीकरण सराय एक्ट के तहत हुआ था। वर्ष 1949 में यह चिट फंड कार्यालय में पंजीकृत हुआ। मौजूदा समय में यह पूरी संपत्ति उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड की है। इसकी आय का सात प्रतिशत वक्फ बोर्ड को जाता है। उन्होंने बताया कि हर 20 से 30 वर्ष में इसका निर्माण और मरम्मत कार्य होता रहा है। समय-समय पर कमरे, मैरिज हॉल और अन्य हिस्सों का निर्माण कराया जाता रहा है।
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