‘चढ़ गुंडों की छाती पर, मुहर लगेगी हाथी पर...’ का नारा देने वाली कैडर आधारित बसपा को बाहुबलियों और दागियों से कोई परहेज नहीं। इसकी बानगी विधानसभा चुनाव के लिए पूर्वांचल के 10 जिलों के बसपा प्रत्याशियों की सूची में दिखती है। इनमें से दो बाहुबली अभी जेल में हैं। भ्रष्टाचार में फंसे एक प्रत्याशी हाल ही में जेल से बाहर आए हैं। छह से अधिक प्रत्याशी ऐसे हैं, जिन पर गंभीर अपराधों और भ्रष्टाचार के आरोपों में मुकदमे दर्ज हैं।
मऊ सदर विधायक मुख्तार अंसारी की पार्टी कौमी एकता दल की बात सपा से नहीं बनी तो गुरुवार को उनका पूरा कुनबा बसपाई हो गया। आगरा जेल में निरुद्ध मुख्तार अंसारी पर हत्या, अपहरण जैसे संगीन आरोपों से बसपा सुप्रीमो मायावती को अब कोई गुरेज नहीं है। बता दें कि मुख्तार 2007 के विधानसभा चुनाव के दौरान भी बसपा में शामिल हुए थे लेकिन 2010 में बसपा सुप्रीमो ने उन्हें निकाल दिया था।
झारखंड की जेल में बंद बाहुबली विनीत सिंह चंदौली की सैयदराजा सीट से बसपा प्रत्याशी हैं। भदोही से बसपा ने पूर्व मंत्री रंगनाथ मिश्र को प्रत्याशी घोषित किया है, जो आय से अधिक संपत्ति और लैकफेड घोटाले के आरोप में जमानत पर हैं। वाराणसी में सेवापुरी सीट से महेंद्र नाथ पांडेय बसपा प्रत्याशी हैं, जो इसी सप्ताह जेल से छूटे हैं। महेंद्र बहुचर्चित एनआरएचएम घोटाले के आरोपी हैं।
उधर, आजमगढ़ में सदर विधानसभा के प्रत्याशी भूपेंद्र सिंह व अतरौलिया से चुनाव लड़ रहे अखंड प्रताप सिंह और चंदौली के सकलडीहा से प्रत्याशी उपेंद्र सिंह गुड्डू की जरायम की दुनिया में दखल किसी से छिपी नहीं है। इसी तरह लैकफेड घोटाले में चर्चित रहे पूर्व मंत्री चंद्रदेव राम यादव को आजमगढ़ की निजामाबाद सीट से बसपा ने टिकट दिया है। यही नहीं, विवादों को लेकर अक्सर चर्चा में रहने वाले घूराराम को बलिया के बेल्थरा रोड से प्रत्याशी बनाया गया है।
बीते साल दिसंबर में बिहार में विधायक रहे बाहुबली राजन तिवारी गोरखपुर में बसपा में शामिल हुए थे। राजन को पूर्वांचल में बसपा के पक्ष में सर्व समाज खासतौर से ब्राह्मणों को जोड़ने की जिम्मेदारी दी गई थी। 90 के दशक में माफिया श्रीप्रकाश शुक्ला के साथ नाम आने से चर्चा में आए राजन देवरिया या कुशीनगर से चुनाव लड़ना चाहते थे।