लालगंज सुरक्षित सीट पर आजादी के 67 साल बाद कमल को खिलने का मौका मिला। 2014 के लोकसभा चुनाव में यह सीट भाजपा के खाते में गई। इस सीट पर भी सबसे अधिक पांच बार कांग्रेस को जीत मिली। बसपा तीन, सपा व जनता दल दो-दो तो पीएसपी, बीएलडी, जेएनपी (एस) व बीजेपी को एक-एक बार जीत का मौका मिला।
आजमगढ़ की दूसरी लोकसभा सीट लालगंज अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित है। इस सीट पर सर्वाधिक प्रतिनिधत्व छह बार रामधन का रहा है। विभिन्न दलों के प्रत्याशी के रूप में रामधन ने सीट पर नुमाइंदगी की है। वहीं डॉ. बलिराम तीन बार तो विश्वनाथ व दरोगा प्रसाद सरोज दो-दो बार इस सीट से सांसद रहे। छांगुर राम, विश्राम व नीलम सोनकर एक-एक बार संसद पहुंचे।