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पूर्वांचल में बगावत पर उतरेंगे कई दिग्गज नेता

Sat, 28 Jan 2017 08:01 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला, गाजीपुर
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विजय मिश्रा - फोटो : अमर उजाला
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 विधानसभा चुनाव करीब आते ही सालों से चुनाव के लिए जमीन तैयार करने वाले कई दिग्गजों के टिकट कट गए हैं। जिसमें सपा की पूर्व मंत्री शादाब फातिमा, मंत्री विजय मिश्रा, विधायक सुब्बा राम, बसपा के विनोद राय के साथ ही भाजपा के 12 दावेदारों का टिकट काटा गया है।
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जबकि कांग्रेस और भासपा के भी दावेदार गठबंधन से इस बार मायूस हैं। इनमें से कुछ बागी हो गए हैं, तो कुछ विकल्प न मिलने से शांत हैं। लेकिन पार्टी के प्रति गुस्सा अंदर ही अंदर सुलग रहा है।

पूर्व मंत्री शादाब फातिमा अब सीधे बगावत पर उतर आई हैं। कुछ दिन पहले जहूराबाद में न केवल सपा उम्मीदवार का पुतला फूंका गया था, बल्कि पार्टी विरोधी नारे भी लगाए गए थे। अब पूर्व मंत्री सपा के खिलाफ जहूराबाद से निर्दल चुनाव लड़ने का मूड बना रही हैं।
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उनके करीबियों की माने तो शादाब फातिमा अपने नए अभियान की शुरूआत 29 जनवरी को रोड शो के माध्यम से करने जा रही हैं। इस बात की पुष्टि उनके प्रतिनिधि असलम ने की है। यह रोड शो सुबह 11 बजे बहादुरगंज से प्रारंभ होगा।

इसके बाद कासिमाबाद, कादीपुर, गंगौली, अलावलपुर, जहूराबाद, सलामतपुर, बड़ौरा, कुतुबपुर, बाराचवर,  दुबिहां मोड़ से होते हुए ताजपुर पहुंच कर जनसभा में परिवर्तित हो जाएगा। शादाब फातिमा के टिकट कटने के पीछे सपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव का करीबी होना बताया जाता है।
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ऐन वक्त पर टिकट कटने का है मलाल

कुशमौर स्थित एनबीएआईएम सभागार में पत्रकारों से बात करते सपा के प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव।
​इसी कारण अखिलेश यादव ने उनका टिकट काट दिया। कुछ ऐसा ही सदर विधायक तथा धर्मार्थ मंत्री विजय मिश्र के साथ हुआ। हालांकि धर्मार्थ मंत्री और जखनियां विधायक सुब्बा राम टिकट कटने के बाद भी बिल्कुल शांत हैं। इनकी अगली चाल क्या होगी अभी तक सार्वजनिक नहीं हुआ है। 

उधर मुहम्मदाबाद विधानसभा क्षेत्र से बसपा के उम्मीदवार रहे विनोद राय का टिकट भी काट दिया गया, जिससे वह आहत हैं। उनके द्वारा बगावत शुरू करते ही उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया। यही हाल भाजपा के उन दावेदारों का है, जिनको वादा करके टिकट नहीं दिया गया है।

कई कद्दावर नेता कुछ माह पहले तथा कुछ दिन पहले भाजपा की सदस्यता इस लालच में ग्रहण किए थे कि उनको भी टिकट दिया जाएगा। लेकिन अंतत: मायूसी ही उनके हाथ लगी। अब पार्टी में जगह-जगह भीतरघात की स्थिति बनती जा रही है।
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