आईएमएस बीएचयू के नर्सिंग कॉलेज में बीएससी नर्सिंग की मान्यता तीन साल पहले ही रद कर दी गई थी। इसके बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन दाखिला देता रहा और छात्र-छात्राओं से मोटी फीस वसूलता रहा।
अब इस कोर्स में अध्ययनरत 260 छात्र-छात्राओं का भविष्य दाव पर है। वर्ष 2015 में ही इंडियन नर्सिंग काउंसिल, स्टेट काउंसिल ने बीएचयू के नर्सिंग कॉलेज में मानक के अनुसार शिक्षण व अन्य सुविधाएं न होने का हवाला देते हुए मान्यता रद कर दी थी। इसकी जानकारी छात्रों को तब हुई जब उनका दाखिला हो गया था।
नर्सिंग कॉलेज में वर्ष 2015 से 2017 तक 260 (क्रमश: 100-100 और 60) छात्र-छात्राओं का दाखिला लिया है। वर्ष 2015 में दाखिला लेने वाले छात्रों को अब डिग्री मिलने वाली है। मगर इसे मान्यता नहीं है। इसलिए छात्रों को भविष्य की चिंता सता रही है।
छात्र-छात्राओं ने स्थानीय स्तर पर कुलपति, आईएमएस डायरेक्टर, प्रोफेसर इंचार्ज, डीन को पत्र लिखने के साथ ही इंडियन नर्सिंग काउंसिल में भी गुहार लगाई, लेकिन अब तक कोई फैसला नहीं हो सका है। अधिकारी केवल जल्द से जल्द मानक पूरा कर लेने और काउंसिल से मान्यता ले लेने की बात कर रहे हैं लेकिन हकीकत यह है कि अब तक इस दिशा में कोई सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आया है।