वाराणसी में बाबतपुर फोरलेन फ्लाईओवर निर्माण कार्य के दौरान तरना चमांव के पास शटरिंग गिरने की घटना के बाद लोग सेतु निगम की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
15 मई को कैंट के समीप चौकाघाट फ्लाईओवर की बीम गिरने से 15 लोगों की मौत हो गई थी। सेतु निगम ने सुरक्षा मानकों का ध्यान राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की तरह से नहीं लिया था।
लोग चर्चा कर रहे हैं कि काश ऐसे ही सुरक्षा मानक चौकाघाट फ्लाईओवर में सेतु निगम अपनाता तो जनहानि नहीं होती। इंजीनियरों की मानें तो जिस प्रकार से बाबतपुर के पास काम चल रहा है। वहां सारे सुरक्षा मानकों का ख्याल किया जा रहा है। इसके लिए सेफ्टी इंजीनियरों को रखा गया है।
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के इंजीनियरों की मानें तो जब तक सुरक्षा मानक पूरे नहीं होते हैं तब तक काम शुरू नहीं कराया जाता है। यही कारण है कि जहां घटना हुई है वहां 72 दिनों का ब्लाकेज लिया गया है।
इधर से कोई वाहन नहीं गुजरता है। इसके लिए रूट डायवर्ट किया गया है। यही नहीं ढलाई के दौरान भी सुरक्षा जाली लगाई गई थी। इसके चलते ऊपर से गिरने वाली लोहे की प्लेट और मलबा फंस गया और थोड़ा बहुत ही मलबा नीचे गिरा।