दूसरा सत्र 'रचनात्मक अर्थव्यवस्था में कॉपीराइट और नैतिक एआई की सर्वोत्तम प्रथाओं को बढ़ावा देना' विषय पर केंद्रित रहा। इसकी अध्यक्षता इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने की। चर्चा में रचनात्मक क्षेत्रों में एआई के बढ़ते उपयोग के बीच कॉपीराइट संरक्षण, सांस्कृतिक श्रेय और नैतिक मानकों की आवश्यकता पर जोर दिया गया। साथ ही ब्रिक्स देशों के बीच इस क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं पर भी विचार किया गया।
बैठक के समापन पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आयोजित की गईं। संगीतमय प्रस्तुति में भारत की विविध संगीत परंपराओं के माध्यम से सांस्कृतिक बहुलता और एकता का संदेश दिया गया। इसके बाद 'कलर्स ऑफ इंडिया' शीर्षक से आयोजित प्रस्तुति में देश के विभिन्न शास्त्रीय और लोक नृत्य रूपों का प्रदर्शन किया गया।
इन प्रस्तुतियों ने विदेशी प्रतिनिधियों को भारत की समृद्ध कलात्मक विरासत और सांस्कृतिक विविधता से परिचित कराया। शुक्रवार को होने वाली बैठक में ब्रिक्स सदस्य देशों के बीच सांस्कृतिक सहयोग के प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर आगे की चर्चा की जाएगी।