काशी में शनिवार बाह्मणों के लिए जाने-अनजाने में हुए पापों से छुटकारे का दिन रहा। सुबह पारंपरिक वेश में बाह्मणों के समूह गंगा तटों पर पहुंचे और कमर तक जल में खड़े होकर पापों से मुक्ति के लिए मंत्रोच्चार के साथ क्षमा याचना की। श्रावणी उपाकर्म करने के लिए अस्सी, तुलसी घाट, अहिल्याबाई घाट और सिंधिया घाट पर वेदाचार्यों और बटुकों की भीड़ लगी रही।
जन्म जन्मांतर के पापों के शमन के लिए बाह्मणों ने सुबह गंगा तटों पर मां गायत्री से क्षमा याचना की। सूर्य को नमन कर आंतरिक ऊर्जा के संचार के लिए प्रार्थना भी की। मुंडन कराने के बाद हाथ में कुश लेकर बाह्मणों ने वैदिक मंत्रों का सस्वर पाठ किया। बाह्मणों के लिए श्रावणी ऐसा पर्व है, जिसमें एक बार ही अंत:करण की शुद्धि करने और जनेऊ बदलने से वर्ष भर शुद्धता बनी रहती है। अहिल्याबाई घाट पर केंद्रीय ब्राह्मण महासभा, और शास्त्रार्थ महाविद्यालय की ओर से हिमाद्रि के संकल्प के साथ उपाकर्म हुआ। इसके बाद
दशाश्वमेध स्थित शास्थार्थ वेद विद्यालय में ऋषि पूजन किया गया। इस मौके पर गणेश दत्त शास्त्री, पं. चूणामणि शास्त्री, आमोद दत्त शास्त्री, पं. गिरीश पांडेय, पं. रमेश तिवारी, आलोक मालवीय, एसएन द्विवेदी, शीतला मंदिर के महंत पं. शिव प्रसाद पांडेय व अजित पाठक आदि मौजूद थे। सिंधिया घाट पर पं. बटुक प्रसाद शास्त्री की मौजूदगी में सतुआ बाबा आश्रम के बटुकों, संन्यासियों ने उपाकर्म में हिस्सा लिया। तुलसी घाट पर भी श्रावणी उपाकर्म कर पापों से मुक्ति के लिए क्षमा याचना की गई।
बीएचयू में भी हुआ ऋषि पूजन
वाराणसी। बीएचयू की ओर से श्रावणी उपाकर्म शनिवार को तुलसी घाट पर किया गया। साथ ही विश्वविद्यालय के मालवीय भवन में ऋषि पूजन समारोह संस्कृत धर्म विज्ञान संकाय के डॉ. उपेंद्र कुमार त्रिपाठी के आचार्यत्व में हुआ। अध्यक्षता करते हुए संकाय प्रमुख प्रो. जी आंजनेय शास्त्री ने कहा कि यह वैदिक ज्ञान यज्ञ है, जिसे महामना स्वयं किया करते थे। इस मौके पर पूर्व संकायाध्यक्ष प्रो. कृष्णकांत शर्मा, प्रो. चंद्रमौलि द्विवेदी, प्रो. रामजीवन मिश्र, डॉ. शत्रुघभन त्रिपाठी आदि मौजूद थे।