सिगरा पुलिस के मुताबिक शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम को भेज दिया गया, परिजनों से भी घटना के बाबत पूछताछ की गई। बेटे के इस खौफनाक कदम से पिता हरिशंकर और मां सहित अन्य परिजन बेसुध हो गए।
काश भेज दिया होता, आज आंखों के सामने रहता मेरा लाल
बेसुध पिता हरिशंकर के अनुसार बढ़ती ठंड के कारण और जम्मू में ट्रेनों के निरस्तीकरण की सूचनाओं के चलते उसे मना कर रहा था, यह पता नहीं था कि हमारा बेटा इस तरह का कदम उठा लेगा। उसने हम सभी को अकेला छोड़ दिया, पिता हरिशंकर ने अफसोस जाहिर किया कि काश उसे भेज दिए तो आज मेरा लाल आंखों के सामने रहता।
अभिभावकों द्वारा किसी बात को लेकर अत्यधिक दबाव देना भी बच्चों को तनाव में ला सकता है। डांट से बच्चों की मानसिक स्थिति पर गहरा प्रभाव पड़ता है, जिससे वह अपने आपको हीन भावना से देखने लगते हैं। यही नहीं, वह अपने आपको अपमानित भी समझने लगते हैं। अभिभावकों को बच्चों की मानसिक स्थिति को समय-समय पर परखना जरूरी है। - डॉ. संजय गुप्ता, मनोचिकित्सक, बीएचयू