वाराणसी। सावन के चौथे सोमवार पर बाबा का दरबार श्रद्धालुओं के जयकारों से गूंज उठा। मंगला आरती के बाद से शुरू हुआ दर्शन पूजन का सिलसिला देर रात तक चलता रहा। सुबह के समय श्रद्धालुओं की भीड़ होने के कारण सुरक्षाकर्मी और वालंटियर व्यवस्था बनाए रखने में जुटे रहे।
बाबा विश्वनाथ की भव्य मंगला आरती के दौरान 50 से ज्यादा श्रद्धालु मौजूद रहे। आरती समाप्त होते ही दर्शन पूजन आरंभ हो गया। सोशल डिस्टेंसिंग के साथ श्रद्धालुओं ने बाबा विश्वनाथ का झांकी दर्शन किया। सुबह दर्शन के लिए तय तीनों रास्तों पर लंबी कतार लगी रही। सोमवार को हुई बंदी को इसका कारण माना जा रहा है। सुरक्षाकर्मी और वालंटियर लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराने की कोशिश में जुटे रहे। थर्मल स्क्रीनिंग और सैनिटाइजेशन के बाद पांच-पांच लोगों को मंदिर में प्रवेश दिया गया। गर्भगृह में किसी को जाने की इजाजत नहीं थी। जलाभिषेक के लिए पश्चिम द्वार को छोड़कर तीनों द्वारों पर पात्र लगाए गए थे। ऑनलाइन पूजा की रसीद कटाने वालों के लिए रुद्राभिषेक भी होता रहा। दोपहर बाद से श्रद्धालुओं का दबाव कम होता गया।
जौनपुर से पहुंचे कांवरिये और डाक बम
जौनपुर और आसपास के गांवों से काफी संख्या में कांवरिये पहुंचे। केसरिया वस्त्र वाले इन कांवरियों में ज्यादातर युवा शामिल थे। जौनपुर से ही साइकिल से पहुंची 15 युवाओं के डाक बम की टोली बाबा दरबार में दर्शन कर गदगद नजर आई। पसीने से लथपथ होने के बाद भी चेहरे पर कोई थकान नहीं नजर आई।
बाबा की रुद्राक्ष झांकी सजी
चौथे सोमवार को मंदिर में बाबा विश्वनाथ की रुद्राक्ष झांकी सजी। गर्भगृह में सायंकाल शृंगार भोग आरती से पहले परंपरानुसार, बाबा का रुद्राक्ष से शृंगार किया गया। परिसर भी फूल-पत्तियों और रुद्राक्ष से सजाया गया। पहले सोमवार को शंकर रूप, दूसरे सोमवार को शिव-शक्ति, तीसरे सोमवार को प्रभु की अर्द्धनारीश्वर झांकी सजाई गई थी। अंतिम सोमवार सावन पूर्णिमा पर शिव परिवार गर्भगृह में झूले पर विराजेगा।
बंद रहे शिवालय, सारंगनाथ में झांकी दर्शन
सावन के चौथे सोमवार को भी शहर के प्रमुख शिवालय बंद रहे। महामृत्युंजय, गौरी केदारेश्वर, तिलभांडेश्वर, शूलटंकेश्वर, बीएचयू विश्वनाथ मंदिर सहित सभी प्रमुख शिवालयों में श्रद्धालुओं का प्रवेश प्रतिबंधित रहा। वहीं, सारंगनाथ महादेव मंदिर में झांकी दर्शन का इंतजाम किया गया।