उधर, बसपा और कांग्रेस की प्रत्याशी नहीं उतारने की घोषणा के बाद अब भाजपा की निगाहें सपा की रणनीति पर टिकी हैं। जबकि जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर मात खाई सपा किसी तरह की जोखिम नहीं उठानी चाहती। ऐसे में हर ब्लॉक पर वह दो-दो प्रत्याशी तलाश रही है और उनके नामांकन की तैयारी में है। उधर, बड़ागांव और आराजीलाइंस ब्लॉक को भाजपा ने सहयोगी दल अपना दल के खाते में दिया है। यहां भी जीताऊ प्रत्याशियों पर ही अपना दल दांव लगाएगी।
आठों ब्लॉक में प्रमुख पद के दावेदार बीडीसी के बीच पैठ बनाने में जुटे हैं। इसके लिए ऐड़ी चोटी के जोर के साथ ही अब गुपचुप पार्टियों का भी दौर शुरू हो गया है। इसमें कई ब्लॉक में लड़ाई एकतरफा होने के चलते बीडीसी की पूछ कम है। जबकि जिन ब्लॉक में लड़ाई कांटे की हैं, वहां रिझाने का दौर भी परवान चढ़ रहा है। हालांकि ज्यादातर ब्लाक में दावेदारों ने अपनी रणनीति के अनुसार बीडीसी का समर्थन हासिल कर लिया है।
इसमें बीडीसी दूसरे पाले में न जाने में पाए इसके भी प्रबंध कर दिए गए हैं। हालांकि इस चुनाव परिणाम को रोहनिया, पिंडरा, अजगरा, सेवापुरी और शिवपुर विधानसभा में वर्चस्व से जोड़ा जा रहा है। फिलहाल यहां भाजपा के विधायक ही हैं, मगर विपक्षी दल भी इसी बहाने शक्ति प्रदर्शन के मूड में हैं।