गरीबों के हिस्से का 25 से 30 फीसदी अनाज जिले में हर महीने कालाबाजारी की भेंट चढ़ जा रहा है। करोड़ों रुपये के अनाज के इस गोरखधंधे में कोटेदार ही नहीं, ऊपर से नीचे तक के अधिकारी-कर्मचारी शामिल हैं। नतीजा, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम लागू होने के बावजूद हर गरीब को अनाज नहीं मिल पा रहा है। कभी डरा-धमकाकर तो कभी तरह-तरह की बहानेबाजी कर गरीबों को दुकानों से भगाने वाले कोटेदार मोटा मुनाफा कमा रहे हैं। शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों ने चुप्पी साध रखी है।
खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत जिले में छह लाख अट्ठारह हजार तीन सौ उनहत्तर कार्डधारक हैं। वितरण के लिए प्रति महीने करीब 50 हजार क्विंटल गेहूं और 75 हजार क्विंटल चावल का कोटा निर्धारित है। जानकारों का दावा है कि इसमें 25 से 30 फीसदी अनाज की हर महीने कालाबाजारी होती है और यह सब कोटेदारों और अधिकारियों की मिलीभगत से होता है। कुछ ऐसा ही हाल केरोसिन तेल का भी है।
अनाज और केरोसिन वितरण की शुरुआत हर महीने की पांच तारीख से होती थी। नियमानुसार हर गरीब को अनाज और तेल बांटने तक दुकान खोलने का निर्देश दिया जाता लेकिन बीच में ही कोटेदार दुकान बंद कर देते हैं। घटतौली की भी शिकायतें सामने आती रही हैं। कुछ लोग अनाज लेने नहीं जाते तो कुछ को भागदौड़ के बाद भी अनाज नहीं मिल पाता। दो रुपये किलो गेहूं और तीन रुपये किलो चावल कोटे से मिलता है। इसी तरह, बाजार में केरोसिन तेल 45 से 50 रुपये प्रति लीटर मिलता है जबकि कोटे से 20.25 रुपये प्रति लीटर। इसकी भी कालाबाजारी की जा रही है।