वर्तमान में पूर्वांचल की 26 में 25 सीटों पर भाजपा और उसके सहयोगी दलों के सांसद हैं। इसमें वाराणसी से पीएम मोदी, गाजीपुर से रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा, चंदौली से भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय और मिर्जापुर से अपना दल (एस) की नेता केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल हैं। पूर्वांचल की एक मात्र सीट आजमगढ़ सपा के कब्जे में है। पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव यहां से सांसद हैं।
पूर्वांचल में जातिगत समीकरण के तहत गठबंधन में उतरी सपा-बसपा की सफलता भविष्य के गर्भ में है मगर, उपचुनाव में गोरखपुर जीतने के बाद सपा ने अपनी जमीन मजबूत की थी। बसपा से गठबंधन के सहारे सपा पिछले चुनाव में रह गई सीटों पर वापसी का प्रयास करेगी। इसी तरह बसपा अपने कैडर वोट सहेज रही है। पार्टी का पहला प्रयास होगा कि वह इस क्षेत्र में दोबारा खाता खोले।
पूर्वांचल की लोकसभा सीटें
वाराणसी, भदोही, मिर्जापुर, आजमगढ़, घोसी, लालगंज, सलेमपुर, बलिया, जौनपुर, मछलीशहर, गाजीपुर, चंदौली, कुशीनगर, गोरखपुर, देवरिया, बांसगांव, बहराइच, डुमरियागंज, महराजगंज, आंबेडकरनगर, बस्ती, संत कबीर नगर, फतेहपुर, फूलपुर, इलाहाबाद और प्रतापगढ़।
भाजपा को 2009 में 9 तो 2014 में 23 सीटें मिली थी, अपना दल को 2009 में 0 तो 2014 में 2 सीटें मिली थी। वहीं, सपा को 2009 में 9 तो 2014 में 1 ही सीट मिली थी। कांग्रेस को 2009 में 4 तो 2014 में एक भी सीट नहीं मिल सकी थी। वहीं, बसपा की झोली में 2009 में 4 तो 2014 में 0 सीट गई थी। हालांकि पूर्वांचल की 23 सीटों पर जीतने वाली भाजपा 2018 में गोरखपुर और फूलपुर सीट के उपचुनाव में हार गई थी।
भाजपा को पूर्वांचल में 87 सीटें तो अपना दल को 9 सीटें मिली थी। वहीं ओमप्रकाश राजभर की पार्टी भासपा को सिर्फ 4 सीटें ही मिली थी। सपा सिर्फ 14 सीटों पर अपना कमाल दिखा पाई थी। वहीं, बसपा को सिर्फ 10 सीटें ही मिली थी। 2017 में कांग्रेस पूर्वांचल में अपना खाता ही नहीं खोल पाई थी। वहीं, अन्य दलों ने 6 सीटों पर कब्जा किया।