बेहतर आवासीय सुविधाओं की आड़ में जिला शहरी विकास अधिकरण (डूडा) ने गरीबों के साथ बड़ा मजाक कर दिया है। एक अदद छत की आस में दौड़-धूप और महीनों के इंतजार के बाद उन्हें रहने के लिए दिए गए मकानों में प्लास्टर ही नहीं किया गया है।
दरवाजे और खिड़कियां लगाने की जरूरत नहीं समझी गई। यही नहीं, बारिश के दिनों में मकान झोपड़ी से भी बदतर हो जाते हैं, क्योंकि उनमें पानी रिसता है। हैरत की बात यह है कि गरीबों के इन घरों के बनाने के एवज में डूडा पूरा भुगतान हासिल कर चुका है।
मंगलवार को मंगलवार को अपने विधानसभा क्षेत्र के मवईया वार्ड की जनचौपाल में यह मामला शहर उत्तरी के विधायक रवींद्र जायसवाल के सामने आया। जानकारी के बाद विधायक मौके पर पहुंचे और हकीकत देखी तो दंग रह गए।
इससे खफा सत्तारूढ़ दल के विधायक ने सारनाथ थाने में एफआईआर दर्ज करा दी। विधायक ने कहा कि जनता की शिकायतों के आधार पर डूडा के खिलाफ धोखाधड़ी और छल करने की धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया है।
जायसवाल का कहना है कि इस मामले में वह चुप नहीं बैठेंगे। जनता की गाढ़ी कमाई को लूटने वाले अधिकारियों को हर हाल सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।