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निकाय चुनावः पीएम के संसदीय क्षेत्र में किला बचाने को भाजपा की बढ़ी बेचैनी

Wed, 22 Nov 2017 10:30 AM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
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वाराणसी - फोटो : SELF
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भाजपा के लिए अपने ही गढ़ में खड़ी हुईं चुनौतियों ने उसकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। निकाय चुनाव के टिकट बंटवारे से पार्टीजनों में अंदरखाने उपजी नाराजगी ने प्रदेश ही नहीं, केंद्रीय नेतृत्व तक को चिंता में डाल दिया है। प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र होने के नाते पार्टी नेतृत्व यहां किसी भी स्तर पर कोई चूक नहीं चाहता। वहीं, नगर निगम बनने के बाद से अब तक हर बार जीत हासिल करने के अपने ट्रैक रिकॉर्ड को कायम रखने की पार्टी की रणनीति भी कसौटी पर है।
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पीएमओ से आए फोन के बाद कानपुर का दौरा बीच में छोड़ शनिवार की देर रात अचानक काशी पहुंचे प्रदेश प्रभारी ओम माथुर ने पार्टीजनों से लंबी मंत्रणा की थी।  कुछ घंटों में ही वह यहां से वापस लौट गए लेकिन पार्टी सूत्रों की मानें तो उनके इस दौरे में पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं के लिए अब सब कुछ भुलाकर पार्टी की जीत के लिए एकजुट प्रयास का उनका संदेश साफ था।

सोमवार को गृहमंत्री राजनाथ सिंह, भाजपा सासंद और दिल्ली भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी, केंद्रीय मंत्री शहनवाज अंसारी ने भी वाराणसी में चुनाव का जायजा लिया। भाजपा अधिकारियों संग बैठक कर जीत सुनिश्चत की। सूत्रों का दावा है कि नगर निगम में कई वार्डों में भाजपा की सीटें फंसने सहित टिकट बंटवारे में जमीनी कार्यकर्ताओं को तरजीह न दिए जाने सहित कई शिकायतें हुईं।
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दरअसल, निकाय चुनाव के टिकट वितरण के लिए जो व्यवस्था बनाई गई थी, उसके तहत मात्र 40 प्रतिशत लोगों को ही टिकट मिल पाया। कई सीटों के टिकट सीधे प्रदेश स्तरीय पदाधिकारियों के हस्तक्षेप से तय कर लिए गए। टिकट की इस जोड़तोड़ से मायूस जनप्रतिनिधि, पदाधिकारी और कार्यकर्ता अंदर ही अंदर नाराज हैं। कुछ तो खुलकर विरोध में उतर गए हैं।

पार्टी नेतृत्व तक इसकी सूचना पहुंचने के बाद अब स्थिति संभालने के लिए दिग्गजों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक अगले पांच दिनों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अलावा उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य,  स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह, प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय सहित कई केंद्रीय मंत्री यहां आकर पार्टी के लिए जीत की जमीन तैयार करेंगे। 
 

भाजपा ढूंढ रही एमवाई समीकरण का काट

बीजेपी - फोटो : FILE PHOTO
निकाय चुनाव में विकास और बुनियादी सवालों के साथ ही जातिगत समीकरणों के आधार पर राजनीतिक दल अपनी-अपनी मोर्चेबंदी में जुटे हैं। सपा को अपने परंपरागत मुस्लिम (एम) यादव (वाई) समीकरण का भरोसा है तो वहीं भाजपा इसकी काट ढूंढने के साथ ही अपने परंपरागत वोट बैंक को सहेजने में जुटी है। कांग्रेस और बसपा को भी परंपरागत वोटों के साथ अपने नए समीकरणों से उम्मीदें हैं।

2012 के निकाय चुनाव में चौथी बार भाजपा ने मेयर सीट पर कब्जा किया था। उस दौरान भाजपा के राम गोपाल मोहले को 132800 वोट मिले थे। कांग्रेस के डॉ. अशोक सिंह को 70693 और सपा समर्थित कन्हैया लाल गुप्त को 43902 वोट मिले थे।

तब भाजपा की जीत की वजह मुस्लिम वोटों का बिखराव माना गया। साथ ही, तब सपा सिंबल पर चुनाव नहीं लड़ी थी। इस बार स्थितियां बदली हैं। सपा सिंबल पर चुनाव मैदान में है। कांग्रेस और बसपा ने भी मजबूती से दावेदारी की है।

महापौर पद के लिए भाजपा से मृदुला जायसवाल, सपा से साधना गुप्ता, कांग्रेस से शालिनी यादव और बसपा से सुधा चौरसिया चुनाव मैदान में हैं। पार्टी के परंपरागत वोटरों के साथ ही प्रत्याशियों को समाज के लोगों के समर्थन का भरोसा है। 
 
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भाजपा के चार निवर्तमान पार्षद समेत 17 बागियों पर कार्रवाई

बीजेपी - फोटो : SELF
गंगापुर के बाद महानगर में भी भाजपा ने 17 बागियों पर कार्रवाई सोमवार की देर रात की है। इनमें चार निवर्तमान पार्षद और 13 कार्यकर्ता हैं। जो उत्तरी, दक्षिणी और कैंट विधानसभाओं के विभिन्न वार्डों में भाजपा प्रत्याशी के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं।

इनमें टकटकपुर से पार्षद विजयलक्ष्मी के पति अशोक मौर्य, लक्सा के ओम प्रकाश चौरसिया, रमरेपुर नेहा के पति संजय जायसवाल, तुलसीपुर के अशोक सोनकर के अलावा कार्यकर्ताओं में संजय विश्वंभरी आदि शामिल हैं।

महानगर अध्यक्ष प्रदीप अग्रहरि ने बताया कि इनको पार्टी से बाहर करने के लिए प्रदेश की अनुशासन समिति को रिपोर्ट भेजी गई है। इन पर पार्टी के खिलाफ काम करने का आरोप है।

कई चुनाव भी लड़ रहे हैं। उधर निकाय चुनाव प्रभारी सलिल विश्नोई ने कहा कि पार्टी के खिलाफ जो काम करेगा उन पर कार्रवाई की जाएगी। और लोगों को भी चिह्ति किया जा रहा है। 
 
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