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भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का सवाल है निकाय चुनाव, इसे बनाया अपना ‘हथियार’

Mon, 16 Oct 2017 02:31 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
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सीएम योगी, भाजपा अध्यक्ष डॉ. महेंद्र नाथ व डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य - फोटो : amar ujala
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विधानसभा चुनाव के बाद एक बार फिर वाराणसी में राजनीति की हवा तेज हो गई है। निकाय चुनाव को लेकर सभी दल गुणा-गणित दुरुस्त करने में लगे हैं। विधानसभा चुनाव में भाजपा को यहां शानदार जीत मिली थी लेकिन निकाय चुनाव में अभी स्थिति थोड़ी दूसरी है।   वाराणसी में होनेवाला हर चुनाव हमेशा से भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का सवाल रहा है।  
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निकाय चुनाव में सरकार और संगठन की उपलब्धियां जनता तक पहुंचाने के लिए भाजपा ने अपने तंत्र को नए सिरे से दुरुस्त किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कल्याणकारी कार्यक्रम तो संगठन के पास हैं ही, योगी सरकार की ओर से छह महीने में किए गए काम भी अब उसके हिस्से में आ गए हैं। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय ने राज्य सरकार द्वारा अब तक कराए गए कार्यों और आगे की योजनाओं के बारे में जानकारी देने के लिए सोशल मीडिया को सक्रिय कर दिया है।

 सोशल मीडिया के मेसेज में संगठन को तवज्जो देते हुए बताया जा रहा है कि योगी सरकार की ओर से किए जा रहे कार्य पार्टी के घोषणा पत्र और संकल्प पत्र का हिस्सा हैं। किसानों की कर्ज माफी, एंटी रोमियो स्क्वाड, बूचड़खाने और बिजली आपूर्ति के बारे में लोगों को वे तथ्य बताए जा रहे हैं, जिन पर लोग चर्चा करें। इन संदेशों में डॉ. पांडेय की बड़े फोटो के साथ यह बताने की भी कोशिश की जा रही है कि संगठन प्रमुख है। जनहित में घोषित और क्रियान्वित की जा रही कल्याणकारी योजनाओं पर अमल और संगठन की बदौलत ही हो रहा है।
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सूत्रों की मानें तो आईटी सेल सोशल मीडिया के प्लेटफार्म जैसे व्हाट्सएप, फेसबुक और एसएमएस के जरिए प्रतिदिन हजारों लोगों को जोड़ रहा है। पार्टी के प्रमुख पदाधिकारियों द्वारा अलग-अलग ग्रुप भी बनाए जा रहे हैं, ताकि सरकार की उपलब्धियां बताने के साथ-साथ लोगों को इसी पर चर्चा करने का माहौल बना दिया जाए।

बनारस और चंदौली के अलावा लखनऊ आईटी सेल से प्रतिदिन भेज कर पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया जा रहा है कि निकाय चुनाव में जीत हासिल करने के लिए वे ये प्रचारात्मक संदेश रोजाना कम से कम पांच लोगों को भेजें।
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भाजपा के लिए यह सबसे बड़ी चुनौती

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वाराणसी नगर निगम के महापौर पद के चुनावी मुकाबले से पहले भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती सशक्त उम्मीदवार की तलाश की है। ओबीसी महिला उम्मीदवार के चयन पर बनारस के साथ ही लखनऊ से नई दिल्ली तक मंथन का दौर शुरू हो चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र होने के साथ ही प्राचीन धार्मिक-सांस्कृतिक नगरी काशी की पूरी दुनिया में अपनी अलग पहचान है।

पार्टी के शीर्ष रणनीतिकार चाहते हैं कि टिकट उसी महिला उम्मीदवार को दिया जाए जिसकी अपनी सशक्त पहचान हो। उच्च शिक्षित होने के साथ ही सामाजिक-राजनीतिक गतिविधियों से भी वह किसी ने किसी रूप में जुड़ी हो। इसके लिए  संघ और आनुषांगिक संगठनों के भी सुझाव और विकल्प पर मंत्रणा चल रही है।

पार्टी के इस रुख से पत्नी या फिर करीबियों को टिकट दिलाने की मशक्कत में जुटे तमाम भाजपा नेताओं को झटका लग सकता है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक नई दिल्ली से लखनऊ तक की नजर है। पीएम का संसदीय क्षेत्र होने के नाते पार्टी के शीर्ष रणनीतिकारों का मानना है कि यहां प्रत्याशी की छवि ऐसी होनी चाहिए कि जनता में सशक्त महिला के भाजपा और सरकार के नारे के प्रति सार्थक संदेश जाए।

इस नाते पार्टी किसी के दबाव या प्रभाव में आकर यहां कोई निर्णय नहीं लेना चाहती। पार्टी की महिला विंग की कुछ पदाधिकारियों के अलावा संगठन से जुड़ीं विश्वविद्यालयों की प्रोफेसर, डॉक्टर और इंजीनियर जैसे उच्च शिक्षित प्रोफेशनल्स पर भी विचार किया जा सकता है।

इसके पीछे सोच यह है कि उच्च शिक्षित महिला ही देश-विदेश में जाकर आध्यात्मिक नगरी काशी की पहचान को बेहतर ढंग से रख सकती है। हालांकि पार्टी के दिग्गज अभी इस बारे में कुछ भी कहने से बच रहे हैं। उनका कहना है कि पार्टी तय व्यवस्था के तहत निर्णय लेगी।
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