रामनगर स्थित पराग डेयरी का बायो गैस प्लांट अब पूरी क्षमता से चलने लगा है। इससे तैयार चार हजार क्यूबिक मीटर गैस से प्लांट का ब्वॉयलर चलाया जा रहा है। इससे 20 फीसदी तक ईंधन की बचत हो रही है।
राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) की ओर से प्रदेश में पहली बार किसी डेयरी को उर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाने के लिए बायोगैस प्लांट का निर्माण किया है। रामनगर स्थित औद्योगिक क्षेत्र फेज वन में पराग डेयरी परिसर में ढाई एकड़ क्षेत्रफल में 24 करोड़ रुपये की लागत से बने बायोगैस प्लांट अब पूरी क्षमता से चलने लगा है। इसे चलाने के लिए प्रतिदिन 100 टन गोबर की खपत हो रही है। इसके लिए प्लांट से दस किलोमीटर के दायरे में लगभग 150 से अधिक गांवों के 50 हजार से अधिक पशुपालकों से गोबर की खरीद की जा रही है। इससे किसानों को दोहरा फायदा मिल रहा है। पशुपालक डेयरी में दूध के साथ अब गोबर भी बेचकर कमाई कर रहे हैं।
डेयरी के अधिकारियों के अनुसार, प्लांट में गैस साथ ही वेस्ट से जैविक खाद भी तैयार की जा रही है। सब्जियों की खेती के लिए यह फायदेमंद होगी। प्रायोगिक तौर पर इसे गुजरात की एक खाद की कंपनी को भेजा रहा है। परिणाम अच्छे होने पर इसे वाराणसी और आजमगढ़ शाखाओं से किसानों को रियायत दर पर दिया जाएगा। डेयरी के प्रबंध निदेशक राजेंद्र सहगल ने बताया कि बायोगैस प्लांट अब पूरी क्षमता से चल रहा है। पहले प्लांट के ब्वॉयलर को चलाने के लिए हजारों लीटर डीजल की खपत होती थी। अब 20 प्रतिशत ईंधन की बचत हो रही है।