कैंसर, पार्किंसन पर भी शोध
सीडीआरआई के साथ मिलकर बीएचयू के चिकित्सक और वैज्ञानिक केवल कोरोना की दवा ही नहीं, बल्कि कैंसर, मस्तिष्क संबंधी बीमारी पार्किंसन और अन्य बीमारियों से लड़ने में कारगर दवाओं पर काम करेंगे। विज्ञान संस्थान निदेशक प्रो. त्रिपाठी ने बताया कि इसके लिए सीडीआरआई निदेशक ने संस्थान के वैज्ञानिकों को कई जानकारियां दीं। बताया कि यह खास पहल होगी, जब आईएमएस बीएचयू, विज्ञान संस्थान सीडीआरआई के साथ काम करेगा।
सीरो सर्वे, ब्लड सैंपल की चल रही जांच
बीएचयू विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिक अभी कोरोना महामारी को लेकर कई शोध कार्य कर रहे हैं। इसमें प्राणि विज्ञान विभाग के प्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे आईएमएस के चिकित्सकों के साथ मिलकर अभी सीरो सर्वे को लेकर शोध में लगे हैं। इसमें न केवल यूपी बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों में रहने वाले लोगों का सीरो सैंपल लेकर रोग प्रतिरोधक क्षमता की जांच की जा रही है। इसके अलावा ब्लड सैंपल लेकर लोगों में संक्रमण के बारे में भी जानकारी की जा रही है। यहीं नहीं, मस्तिष्क संबंधी बीमारियों के बारे में भी प्रो. चौबे और न्यूरोलॉजी विभाग के चिकित्सक डॉ. अभिषेक पाठक आदि शोध कार्य में लगे हैं।
अभी लक्षणों के आधार पर दी जा रही दवा
कोरोना संक्रमित मरीजों को अभी कोरोना बीमारी में लक्षण की दवा ही दी जा रही है। सर्दी, खांसी, बुखार, जुकाम, सांस में परेशानी ही कोरोना के सामान्य लक्षण है। इसमें जरूरत के हिसाब से कुछ गंभीर मरीजों को आक्सीजन थेरेपी भी देनी पड़ती है। जबकि सामान्य मरीजों को सर्दी, खांसी, जुकाम, बुखार कम करने वाली दवाएं ही दी जाती हैं। कोरोना संक्रमित मरीजों को विटामिन की दवाएं भी इलाज के दौरान दी जा रही हैं। अगर कोई पहले से बीपी, शुगर की दवा ले रहा है तो वह भी दी जाती है। - प्रो.केके गुप्ता, कोविड नोडल प्रभारी बीएचयू