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कोरोना की दवा के ट्रायल में अहम भूमिका निभाएगा बीएचयू, सीडीआरआई से जल्द होगा ये समझौता

Sat, 30 Jan 2021 02:32 PM IST
गीतार्जुन गौतम रबीश श्रीवास्तव, अमर उजाला, वाराणसी
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काशी हिंदू विश्वविद्यालय। - फोटो : अमर उजाला।
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कोरोना का टीका बनने के बाद अब वैज्ञानिक दवा बनाने में जुटे हैं। दवा कब तक तैयार होगी, इस बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है, लेकिन इसको लेकर जो काम चल रहा है, उसमें बीएचयू भी अहम भूमिका निभाएगा। इसके लिए सीडीआरआई (सेंट्रल ड्रग रिसर्च इंस्टीट्यूट) लखनऊ, आईएमएस बीएचयू और विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिक मिलकर काम करेंगे। ऐसा पहली बार होगा, जब इस तरह की वैश्विक महामारी से लड़ने के लिए सीडीआरआई का साथ बीएचयू दे रहा है। दोनों संस्थानों के बड़े अधिकारियों के बीच बातचीत के बाद अब समझौता पत्र पर हस्ताक्षर की तैयारी चल रही है। जल्द औपचारिकता पूरी होने के बाद काम शुरू हो जाएगा।

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देश में विभिन्न बीमारियों की दवा बनाने में सीडीआरआई की अहम भूमिका होती है। कोरोना की दवा के असर का पता लगाने के लिए सीडीआरआई की ओर से जल्द ट्रायल भी शुरू किया जाना है। ट्रायल में केजीएमयू, लोहिया इंस्टीट्यूट के साथ अब आईएमएस बीएचयू भी शामिल होगा। जानकारी के मुताबिक, वर्तमान में सीडीआरआई के निर्देशन में ही एंटीवायरल ड्रग उमिफेनोविर का क्लीनिकल ट्रायल किया जाना है। अगर इसमें वैज्ञानिकों को सफलता मिलती है और औपचारिकताएं पूरी होने के बाद इसे मंजूरी मिलती है तो यह बीएचयू के लिए खास होगा।

विज्ञान संस्थान निदेशक से मिले सीडीआरआई के निदेशक
बीएचयू विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. अनिल त्रिपाठी के मुताबिक दो दिन पहले सीडीआरआई के निदेशक प्रो. तापस कुंडु ने विज्ञान संस्थान आकर मुलाकात की थी। इस दौरान विभिन्न बीमारियों, दवाओं के बनाने के साथ अन्य मुद्दों पर चर्चा हुई। इसमें विज्ञान संस्थान में शोध कार्य करने वाले 30 से अधिक शिक्षक भी शामिल रहे। बताया कि कोरोना दवा के ट्रायल में बीएचयू भी सहयोग करेगा। इस दिशा में सार्थक बातचीत हुई है। बहुत जल्द कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद बीएचयू की ओर से सीडीआरआई को समझौते के लिए पत्र भी भेजा जाएगा।

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कैंसर, पार्किंसन पर भी शोध 
सीडीआरआई के साथ मिलकर बीएचयू के चिकित्सक और वैज्ञानिक केवल कोरोना की दवा ही नहीं, बल्कि कैंसर, मस्तिष्क संबंधी बीमारी पार्किंसन और अन्य बीमारियों से लड़ने में कारगर दवाओं पर काम करेंगे। विज्ञान संस्थान निदेशक प्रो. त्रिपाठी ने बताया कि इसके लिए सीडीआरआई निदेशक ने संस्थान के वैज्ञानिकों को कई जानकारियां दीं। बताया कि यह खास पहल होगी, जब आईएमएस बीएचयू, विज्ञान संस्थान सीडीआरआई के साथ काम करेगा। 

सीरो सर्वे, ब्लड सैंपल की चल रही जांच 
बीएचयू विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिक अभी कोरोना महामारी को लेकर कई शोध कार्य कर रहे हैं। इसमें प्राणि विज्ञान विभाग के प्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे आईएमएस के चिकित्सकों के साथ मिलकर अभी सीरो सर्वे को लेकर शोध में लगे हैं। इसमें न केवल यूपी बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों में रहने वाले लोगों का सीरो सैंपल लेकर  रोग प्रतिरोधक क्षमता की जांच की जा रही है। इसके अलावा ब्लड सैंपल लेकर लोगों में संक्रमण के बारे में भी जानकारी की जा रही है। यहीं नहीं, मस्तिष्क संबंधी बीमारियों के बारे में भी प्रो. चौबे और न्यूरोलॉजी विभाग के चिकित्सक डॉ. अभिषेक पाठक आदि शोध कार्य में लगे हैं।
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अभी लक्षणों के आधार पर दी जा रही दवा
कोरोना संक्रमित मरीजों को अभी कोरोना बीमारी में लक्षण की दवा ही दी जा रही है। सर्दी, खांसी, बुखार, जुकाम, सांस में परेशानी ही कोरोना के सामान्य लक्षण है। इसमें जरूरत के हिसाब से कुछ गंभीर मरीजों को आक्सीजन थेरेपी भी देनी पड़ती है। जबकि सामान्य मरीजों को सर्दी, खांसी, जुकाम, बुखार कम करने वाली दवाएं ही दी जाती हैं। कोरोना संक्रमित मरीजों को विटामिन की दवाएं भी इलाज के दौरान दी जा रही हैं। अगर कोई पहले से बीपी, शुगर की दवा ले रहा है तो वह भी दी जाती है। - प्रो.केके गुप्ता, कोविड नोडल प्रभारी बीएचयू 
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