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बीएचयू को दहलाने की थी साजिश

Sat, 03 Sep 2016 02:06 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
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काशी हिन्दू विश्वविद्यालय
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नरेंद्र देव हॉस्टल के कमरे से पेट्रोल बम और लोहे के रॉड की बरामदगी से साफ है कि बीएचयू कैंपस में किसी बड़े बवाल की साजिश रची जा रही थी। छात्रों के बीच छोटी-मोटी मारपीट तो आम बात है, लेकिन कमरे में पेट्रोल बम इकट्ठा करने के खुलासे ने पुलिस के साथ ही विश्वविद्यालय प्रशासन को भी सकते में डाल दिया है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि आखिर पेट्रोल बम इकट्ठा करने के पीछे मकसद क्या था। पुलिस और विवि प्रशासन इसकी तह में जाने की कोशिश में जुटा है।
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बीएचयू के आचार्य नरेंद्र देव हास्टल में करीब 250 से अधिक छात्र रहते हैं। शुक्रवार को कमरा नंबर 27 से आठ पेट्रोल बम की बरामदगी और लोहे की रॉड और पंच मिलने के बाद ये साफ हो गया कि शिकायतकर्ता 122 छात्रों की आशंका सही थी। कुछ लोग कैंपस में बड़ी वारदात की साजिश रच रहे थे। इसके अलावा हॉस्टल में बाहरी युवकों की आवाजाही भी किसी से छिपी नहीं है। कई ने तो ये भी आशंका जताई कि कमरा सील था, वरना हो सकता है कि बुधवार की रात ट्रामा सेंटर व धन्वंतरि हॉस्टल में हुए बवाल में इस्तेमाल किया जाता।


आचार्य नरेंद्र देव हॉस्टल में शुक्रवार को पेट्रोल बम का मिलना किसी गहरी साजिश की ओर इशारा कर रहा है। इससे एक बात ये भी साफ है कि विश्वविद्यालय का सुरक्षा तंत्र पूरी तरह नाकाम साबित हुआ। विश्वविद्यालय प्रशासन सोता रहा लेकिन छात्रों की सक्रियता ने इस गहरी साजिश का पर्दाफाश कर दिया। ऐसा पहली बार हुआ जब छात्रों की सजगता से एक बड़ा हादसा टल गया। छात्रों की ही शिकायत पर बीते शनिवार को संकाय प्रमुख प्रो. मंजीत चतुर्वेदी के निर्देश पर सात कमरों को सील किया गया था। इन्हीं सात सील कमरों में से एक में पेट्रोल बम बरामद हुए।
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आचार्य नरेंद्र देव हॉस्टल के 122 छात्रों ने पिछले सप्ताह हॉस्टल के ही कुछ छात्रों के खिलाफ वार्डन व संकाय प्रमुख से शिकायत की थी। बताया था कि कुछ छात्र आए दिन मारपीट और बवाल में शामिल रहते हैं। उनकी गतिविधियां भी संदिग्ध है। बीते दिनों कई बार आचार्य नरेंद्र देव हॉस्टल में मारपीट की घटनाएं भी हुईं। सप्ताह भर पहले एक साथ 122 छात्रों की शिकायत के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन हरकत में आया। प्रो. मंजीत चतुर्वेदी स्वयं मानते हैं कि छात्रों की ही सक्रियता से ही ये खुलासा हुआ। पेट्रोल बम और रॉड आदि मिलने के बाद विश्वविद्यालय के सुरक्षा तंत्र की नाकामी साफ तौर पर उजागर हुई है।
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