लोकपाल के पत्र पर आधिकारिक आदेश जारी नहीं करने का आरोप
परिषद के कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि आंदोलन समाप्त करने के समय विश्वविद्यालय के लोकपाल की ओर से एक पत्र दिया गया था। कार्यकर्ताओं के मुताबिक, लोकपाल सुखमहेंद्र सिंह की ओर से संबंधित मांगों के संबंध में दिए गए पत्र के आधार पर सोमवार को कार्यालय समय में विश्वविद्यालय प्रशासन को आधिकारिक आदेश जारी करना था। हालांकि, 15 अक्तूबर तक ऐसा नहीं किया गया। परिषद का कहना है कि इस मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन से स्पष्ट जवाब मांगा गया, लेकिन उन्हें संतोषजनक जानकारी नहीं मिली।
कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि कुलपति और लोकपाल की ओर से मामले में स्पष्ट निर्णय देने के बजाय उन्हें आश्वासन देकर टालने का प्रयास किया जा रहा है। उनका कहना है कि विद्यार्थियों की समस्याओं के समाधान के लिए जब संगठन के प्रतिनिधि संबंधित समिति और विश्वविद्यालय प्रशासन के समक्ष पहुंचे, तब भी उन्हें ठोस आश्वासन नहीं मिला। इससे नाराज कार्यकर्ताओं ने कुलपति कार्यालय पर तालाबंदी कर अपना विरोध दर्ज कराया।
समस्याओं के समाधान तक संघर्ष जारी रखने की चेतावनी
विद्यार्थी परिषद ने विश्वविद्यालय प्रशासन से छात्रावासों की समस्याओं, सुरक्षा व्यवस्था और बिजली-पानी सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़े मामलों पर तत्काल संज्ञान लेने की मांग की। परिषद का कहना है कि विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के लिए जरूरी सुविधाओं का दुरुस्त होना आवश्यक है। लंबित मांगों पर निर्णय लेकर उनके समाधान की समयसीमा भी तय की जानी चाहिए।
कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी कि छात्रहित से जुड़े मुद्दों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। परिषद के अनुसार, जब तक विद्यार्थियों की मूलभूत समस्याओं का समाधान नहीं होता और लंबित मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। हालांकि, विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इन आरोपों और तालाबंदी पर उसका पक्ष उपलब्ध नहीं हो सका।