जुलूस में करीब 400 वर्ष पुराने बुढ़िया-बुढ़वा के चेहरे विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। इन प्राचीन मुखौटों के साथ सेल्फी लेने के लिए लोगों में होड़ लगी रही। जुलूस मार्ग पर आकर्षक सजावट की गई थी। पूरे मेले के दौरान मार्गों पर भारी भीड़ रही। सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए वाराणसी प्रशासन की ओर से विशेष इंतजाम किए गए थे।
हालांकि, लाटभैरव से सरैयां तक सड़क की खराब स्थिति के कारण जुलूस में शामिल लाग-विमानों को आगे ले जाने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। खराब रास्ते के चलते कलाकारों और आयोजकों को परेशानी हुई। इसके बावजूद श्रद्धालुओं और दर्शकों का उत्साह बना रहा और लोग विभिन्न धार्मिक प्रसंगों पर आधारित झांकियों को देखने के लिए जुटे रहे।
नक्कटैया जुलूस का संयोजन समिति के प्रधानमंत्री एडवोकेट कन्हैया लाल यादव, उपाध्यक्ष एवं पार्षद मनोज यादव, व्यास पंडित दयाशंकर त्रिपाठी, केवल कुशवाहा, निखिल त्रिपाठी, शिवम अग्रहरि, पार्षद जितेंद्र कुशवाहा, संतोष साहू और पंकज त्रिपाठी सहित अन्य लोगों ने किया। धार्मिक प्रसंगों, पारंपरिक स्वांगों और प्राचीन मुखौटों से सजे जुलूस ने काशी की रामलीला परंपरा और सांस्कृतिक विरासत की झलक प्रस्तुत की।