बीएचयू में विशेषाधिकार के तहत कुलपति के फैसलों के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की गई है। बीएचयू एक्ट के नियम सेवेन-सी और तीन साल से बिना एग्जीक्यूटिव काउंसिल (ईसी) के जितने भी फैसले लिए गए हैं, उसकी जांच की मांग की गई है।
बीएचयू एक्ट 2015 में सेवेन-सी (5) में आपातकाल में कुलपति को विशेषाधिकार दिए गए हैं। बिना ईसी के फैसले लिए जा सकते हैं। अगली ईसी की बैठक में वैधता भी देनी होती है, लेकिन बीएचयू में तीन साल से कोई ईसी ही नहीं है तो बैठक कहां होगी। अब 11 नवंबर को इस मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई की तारीख पड़ी है।
हरिकेश बहादुर सिंह ने ये जनहित याचिका 5 नवंबर को फाइल की है। हाल ही में बीएचयू में रेक्टर की नियुक्ति इसी सेवेन-सी (5) नियम के तहत की गई थी। वहीं, आरोप ये भी है कि बाकी की नियुक्तियां, प्रमोशन, भर्तियां आदि कई फैसले इसी नियम से हुए हैं।
हरिकेश बहादुर सिंह ने कहा कि इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस के तहत बहुत ज्यादा पैसे खर्च किए गए। इसकी भी जांच होनी चाहिए। उन्होंने इसकी राष्ट्रपति से भी शिकायत की है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में बिना ईसी के वित्त, निवेश, प्रॉपर्टी पर कई फैसले हुए हैं।