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बीएचयू मैथिली अध्ययन केंद्र में माता सीता समेत बनेंगी पांच नई शोध पीठ

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वाराणसी। बीएचयू में मैथिली संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए खुले मैथिली अध्ययन केंद्र में पांच नए शोध पीठ स्थापित करने की तैयारी चल रही है। माता सीता, महाकवि विद्यापति, पं. मंडन मिश्र, महाराजा दरभंगा नरेश व मधुबनी कला संस्कृति पर काम करने वाले लोगों से जुड़ी पीठ स्थापित की जाएगी। पीठों के माध्यम से छात्र-छात्राओं को न केवल इनकी जीवनी बल्कि कला, संस्कृति, संगीत को बढ़ावा देने के योगदान से जुड़े विषयों पर शोध का अवसर मिलेगा। केंद्र के सह समन्वयक के मुताबिक, इसके लिए यूजीसी, शिक्षा मंत्रालय, झारखंड सरकार समेत अन्य जगहों पर अनुदान के लिए पत्र भेजने की तैयारी चल रही है।
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कला संकाय प्रमुख के निर्देशन में चलने वाले केंद्र में अगले सत्र से शोध और डिप्लोमा, सर्टिफिकेट कोर्स चलाने संबंधी तैयारियां जोर शोर से चल रही है। बीएचयू प्रशासन की ओर से सात दिसंबर को इसके लिए कला संकाय प्रमुख प्रो. विजय बहादुर को समन्वयक, वसंत महिला महाविद्यालय राजघाट की शिक्षक डॉ. वंदना झा को सह समन्वयक बनाया गया है। डॉ. वंदना झा के मुताबिक पांच शोध पीठ स्थापित करने की योजना है, इससे छात्र-छात्राओं को मैथिली संस्कृति के साथ ही महापुरुषों की जीवनी के बारे में जानने का मौका मिलेगा। बताया कि कला संकाय परिसर में अभिनव भवन जहां भारत अध्ययन केंद्र चल रहा था, वहीं मैथिली अध्ययन केंद्र संचालित होगा। अब पाठयक्रम तैयार करने की दिशा में कार्रवाई चल रही है।
विश्वविद्यालयों से जल्द होगा समझौता
मैथिली अध्ययन केंद्र में डिग्री, डिप्लोमा कोर्स के साथ ही शोध कार्यों और पांडुलिपियों, मधुबनी पेंटिंग सहित अन्य सामग्रियों के यहां अध्ययन के लिए मंगाए जाने आदि विषयों को लेकर जल्द ही जर्मनी, कनाडा, जापान देश-विदेश के अन्य विश्वविद्यालयों से समझौता भी किया जाएगा। सह समन्वयक डॉ. वंदना झा ने बताया कि अभी कला संकाय की संकाय स्तर की पाठयक्रम समिति में पाठ्यक्रमों पर चर्चा के बाद आगे इस दिशा में काम किया जाएगा। बताया कि एक साल( दो सेमेस्टर) का डिप्लोमा, सर्टिफिकेट कोर्स होगा। इसके अलावा समय-समय पर कार्यशालाओं का भी आयोजन किया जाएगा।
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