वाराणसी। योजनाओं को लागू करने और परियोजनाओं की मॉनिटरिंग के लिए जिला प्रशासन आईआईटी बीएचयू की मदद लेगा। शिक्षा, ठोस व गीला अपशिष्ट प्रबंधन और डाटा मैनेजमेंट के लिए आईआईटी के साथ समझौता किया जाएगा। आईआईटी परियोजनाओं के लेट लतीफी को रोकने के लिए शोध और सर्वे करेगा। इसके अलावा जिले भर के डाटा को एक जगह एकत्र करेगा, ताकि योजनाओं को लागू करने में बार-बार डाटा जुटाने की मशक्कत नहीं करनी पड़े।
जिला प्रशासन के अधिकारियों की शुक्रवार को आईआईटी बीएचयू के निदेशक पीके जैन के साथ लंबी चर्चा हुई। इसमें जल संरक्षण, शिक्षा और कूड़ा प्रबंधन पर आईआईटी कार्ययोजना तैयार करेगा। शहर की साफ सफाई के साथ कूड़े के निस्तारण में आधुनिक तकनीक को कम खर्च में लागू करने तक में जिला प्रशासन की मदद करेगा। इसके अलावा योजना के लाभार्थियों की बार-बार बनने वाली सूची को एक साथ तैयार किया जाएगा और अलग-अलग लाभार्थियों की पूरी सूची को आईआईटी मुहैया कराएगा। इससे योजना का लाभ लेने वालों को बार-बार जाति, आय जैसे प्रमाण पत्र के लिए चक्कर नहीं लगाना होगा। इसमें आईआईटी के छात्रों की ओर से शोध भी किए जाएंगे। यहां बता दें कि वाराणसी में ज्यादातर परियोजनाएं समय से पूरी नहीं हो रही हैं और योजनाओं को लागू करने में कई तरह की समस्याएं आती हैं। जिलाधिकारी सुरेंद्र सिंह ने बताया कि आईआईटी बीएचयू से कई अलग-अलग क्षेत्रों में समझौता किया जा रहा है। ताकि योजनाओं और परियोजनाओं को सही दिशा में पूरा कराया जा सके।
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जल संरक्षण पर गांव-गांव होगा सर्वे
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर शुरू हुए जल संरक्षण अभियान में आईआईटी बीएचयू के ज़ुड़ने के बाद गांवों में सर्वे होगा। इसमें अलग अलग गावों की जरुरत के हिसाब से योजना बनाकर जल संरक्षण की योजना बनाई जाएगी।