वाराणसी। आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति के बारे में प्राथमिक से लेकर माध्यमिक विद्यालयों के छात्रों को जागरूक करने की तैयारी चल रही है। ऐसे में आयुर्वेद चिकित्सा जल्द ही इंटर तक के पाठ्यक्रम का हिस्सा हो सकता है। नई शिक्षा नीति का जो ड्राफ्ट तैयार किया गया है, उसमें आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति का जिक्र तो है, लेकिन इसे आमजन तक पहुंचाने के बारे में कोई विकल्प न होने के बाद अब बीएचयू आयुर्वेद के विद्वानों ने एक नया मसौदा तैयार किया है। एमएचआरडी, शिक्षा नीति समिति के चेयरमैन सहित अन्य जगहों पर इसे भेजकर शिक्षा नीति में शामिल करने का सुझाव दिया है।
नई शिक्षा नीति को लेकर तैयार ड्राफ्ट पर जो सुझाव मांगे गए, उसमें विश्वविद्यालयों, कॉलेजों में बैठक, संगोष्ठी आदि के माध्यम से चर्चा के बाद मिले सुझाव एमएचआरडी को भेजे जा रहे हैं। इस बीच आयुर्वेद को नई पहचान दिलाने के उद्देश्य से अब इसे स्कूली शिक्षा के पाठ्यक्रम में शामिल कराने की मुहिम शुरू हुई है। इसमें बीएचयू आयुर्वेद संकाय द्वारा आयुर्वेदिक पद्धति को स्वास्थ्य की मुख्य धारा में जोड़ने का सुझाव दिया गया है। इसके अलावा प्राथमिक (कक्षा 1 से 8 तक ) एवं माध्यमिक (कक्षा 9 से 12 तक ) शिक्षा की पुस्तकों में इसे शामिल कर विद्यार्थियों को आयुर्वेद पद्धति के बारे में जागरूक करने को कहा है।
स्कूली शिक्षा में आयुर्वेद को जोड़ने का लाभ यह होगा कि कम से कम बच्चों को इसके बारे में सही जानकारी मिल सकेगी। आगे की पढ़ाई में भी उनके लिए कोई असुविधा नहीं होगी। प्रस्ताव भेजा गया है, पूरा उम्मीद है कि इस पर विचार कर उसे नई शिक्षा नीति में शामिल किया जाएगा।
-डॉ.आनंद चौधरी, विभागाध्यक्ष रसशास्त्र एवं भैषज्य कल्पना विभाग।