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टीबी मरीजों के इलाज में सावधानी जष्रूरी

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वाराणसी। बीएचयू टीबी एंड चेस्ट विभाग की ओर से आयोजित संगोष्ठी में चिकित्सकों ने टीबी बीमारी के कारण, इलाज की विधि और दवाओं के उपयोग पर विस्तृत चर्चा की। बतौर मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. राकेश भटनागर ने मरीजों के इलाज में सावधानी बरतने की सलाह दी।
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कैंटोंमेंट स्थित एक होटल में आयोजित संगोष्ठी में कुलपति ने कहा कि जिस तरह से टीबी के मरीजों का ग्राफ बढ़ता जा रहा है, उस दिशा में नई दवा बेडाकुलीन का प्रयोग कारगर साबित होगा। यह भी ध्यान देना होगा कि इसे विशेषज्ञों की देखरेख में ही मरीजों को दिया जाए। मुख्य वक्ता पीजीआई चंडीगढ़ में टीबी एंड चेस्ट विभाग के अध्यक्ष प्रो.दिगंबर बेहरे ने बताया कि टीबी के गंभीर मरीजों में जब सभी दवा कारगर नहीं होती है तो उस समय बेडाकुलीन का उपयोग होता है। सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इसका उपयोग हो रहा है।
मास्टर ट्रेनर विकास ओसवाल ने नई दवा के बारे में अधिक से अधिक चिकित्सकों को जागरूक करने पर बल दिया गया। अतिथियों का स्वागत करते हुए बीएचयू टीबी एंड चेस्ट विभाग के अध्यक्ष प्रो. जीएन श्रीवास्तव ने कहा कि चिकित्सकों को चाहिए कि वह इस दवा को मरीजों को देने से पहले उसे इसके फायदे, नुकसान के बारे में उन्हें बताएं। जिससे कि मरीज किसी तरह की असमंजस में न रहे। कार्यक्रम में रेक्टर प्रो.वीके शुक्ला, आईएमएस निदेशक प्रो.आरके जैन, प्रो. एमके सिंह, डॉ. कुंदन कुमार, सीएमओ डॉ. वीबी सिंह, डॉ. आनंद श्रीवास्तव के साथ ही डॉ. देवेंद्र, सौरभ, पुलकित आदि लोग मौजूद रहे।
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