कोरोना की तीसरी लहर के मद्देनजर अस्पतालों में बेड के इंतजाम, जांच की व्यवस्था, डॉक्टरों को प्रशिक्षण सहित सभी सुविधाओं का दावा शासन, प्रशासन की ओर से किया जा रहा है, लेकिन बच्चों के इलाज को लेकर दुश्वारियां कम नहीं हो रही हैं। बीएचयू अस्पताल के इमरजेंसी चिल्ड्रेन वार्ड के भरने से परिजन परेशान हैं। हालत यह है कि वार्ड में मेज पर बच्चों का इलाज हो रहा है। वहीं, बुधवार को एक बेड पर दो बच्चे भर्ती मिले। इसमें से एक बच्चे को तो ऑक्सीजन भी लगा था। मां-बाप बेड खाली होने का इंतजार कर रहे थे।
बीएचयू अस्पताल में साल दर साल सुविधाएं तो बढ़ रही हैं, लेकिन मरीजों की बढ़ती संख्या के हिसाब से यह नाकाफी है। सबसे खराब स्थिति इमरजेंसी की है। नई बिल्डिंग में भूतल का वार्ड तो मरीजों से भरा पड़ा है। प्रथम तल पर बने चिल्ड्रेन वार्ड में भी जगह नहीं मिल पा रही है। बेड ही नहीं इस वार्ड में कई बच्चों का स्ट्रेचर पर इलाज करना मजबूरी है। यहीं नहीं इमरजेंसी के इस चिल्ड्रेन वार्ड में बुधवार को एक बेड पर दो बच्चे भर्ती मिले। दोपहर में बच्चे को गोद में लेकर उसकी मां इमरजेंसी में पहुंची। बच्चे को सांस लेने में तकलीफ थी। डॉक्टरों ने जांच के बाद ऑक्सीजन सिलिंडर मंगाकर ऑक्सीजन देना शुरू किया। महिला नवजात बच्चे को लेकर प्रथम तल पर चिल्ड्रेन वार्ड में पहुंची। यहां बेड तो दूर स्ट्रेचर भी खाली नहीं मिला। ऐसे में वार्ड में ही एक बेड पर बच्चे को लिटाना पड़ा। पास में बैठे डॉक्टरों ने भी बच्चे का इलाज भी किया।
मेज बना बच्चों के इलाज का सहारा
इमरजेंसी के चिल्ड्रेन वार्ड में बेड की कमी है। ऐसे में यहां रखा मेज बच्चों के इलाज में सहारा बन रहा है। मंगलवार को पंचक्रोशी निवासी जिस दस दिन के बच्चे का मेज पर इलाज किया गया उसे बुधवार को बेड मिल गया। इसके बाद मेज खाली हुआ तो यहां एक अन्य नवजात को लिटाया गया। डॉक्टर भी क्या करते, वह भी इसी मेज पर बच्चों का इलाज करते रहे। खास बात यह है कि इस बच्चे को भी ऑक्सीजन लगा था।
वर्जन
अस्पताल में मौजूद संसाधनों में बच्चों समेत सभी मरीजों का बेहतर इलाज किया जा रहा है। इमरजेंसी में बेड के संकट को लेकर अस्पताल के एमएस से बातचीत कर समस्या का समाधान कराया जाएगा।
- प्रो. बी आर मित्तल, निदेशक आईएमएस बीएचयू