बीएचयू के कंप्यूटर साइंस विभाग का मामला
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बीएचयू में शिक्षक नियुक्ति में अनियमितता के हर दिन नया खुलासा हो रहा है। कभी आधे-अधूरे कागजात तो कभी नंबरों के जोड़ में हेराफेरी और जवाब में गोलमाल का मामला सामने आ रहा है। इस बीच सात अप्रैल को एक आरटीआई में जो जवाब दिया गया है, वह चौंकाने वाला है।
इसमें कंप्यूटर साइंस विभाग में हुई असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर नियुक्ति के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में विश्वविद्यालय प्रशासन ने आवेदक को विश्वविद्यालय में नियुक्ति से जुड़ी कोई सूचना न होने की जानकारी दी है। अब बात यह है कि जब कोई सूचना ही नहीं है तो आखिर इनकी नियुक्ति कैसे हुई और यह नौकरी कैसे कर रहे हैं।
विश्वविद्यालय में पूर्व कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी के कार्यकाल में हुई नियुक्तियों को लेकर करीब 100 से अधिक लोगों ने आरटीआई जबकि 30 से अधिक लोगों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर न्याय की गुहार लगाई है। हालांकि अभी कोर्ट का फैसला आना बाकी है लेकिन इस बीच जिस तरह से आरटीआई के जवाब में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं, उससे विश्वविद्यालय प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खड़ा होने लगे हैं।
एक अधिवक्ता ने 13 मार्च 2018 को ऑनलाइन आरटीआई के माध्यम से कंप्यूटर साइंस में हुई तीन नियुक्तियों के बारे में छह बिंदुओं पर जानकारी मांगी थी। इसमें उन्होंने दसवीं से पीजी तक की शैक्षिक योग्यता के जुड़े प्रमाण पत्र, शोध पत्र, कंप्यूटर से जुड़े प्रमाण पत्रों के अलावा आवेदन में दर्शाए गए कागजातों की मांग की थी।
इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन से भी इस पर नियमानुसार जानकारी मांगी गई। सात अप्रैल को आवेदक को जवाब दिया गया है कि नियुक्तियों के मामले में विश्वविद्यालय में वो जानकारी नहीं है।
साथ ही, इस मामले को सात अप्रैल को निस्तारित करने का हवाला देते हुए आरटीआई एक्ट के अनुसार किसी भी कार्य दिवस में कार्यालय आने की पहले सूचना देकर इससे जुड़ी फाइल देखने की बात कही गई है।