बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल में सोमवार को मरीज दिखाने को लेकर डॉक्टरों और छात्रों के बीच दिन में मारपीट हो गई। मामले ने धीरे-धीरे तूल पकड़ लिया और रात को सैकड़ों छात्रों ने कुलपति आवास का घेराव कर लिया। उत्तेजित छात्रों ने नारेबाजी के साथ बैरियर गिरा दिया और पथराव भी किया। छात्रों ने धरना भी शुरू कर दिया है। बवाल को देखते हुए छह थानों की फोर्स के साथ एसीएम थर्ड नागेंद्र नाथ यादव, एसपी सिटी राजेश यादव, तीन सीओ के साथ मौके पर पहुंच गए। एहेतियातन एक कंपनी पीएसी और क्यूआरटी भी बुला ली गई है। रात 11:40 बजे कुलपति प्रो. गिरीश चंद्र त्रिपाठी ने छात्रों के बीच पहुंच कर उन्हें मनाने की कोशिश की लेकिन वे चिकित्सक को निलंबित करने की मांग पर अड़े रहे। रात 12 बजे प्रो. त्रिपाठी ने पांच छात्रों को वार्ता के लिए बुलाया लेकिन नतीजा नहीं निकला। रात एक बजे तक करीब डेढ़ सौ छात्र धरने पर बैठे हुए थे।
घटनाक्रम के मुताबिक हॉस्टल में रहने वाले बीएचयू के विज्ञान संस्थान में बीएससी केमिस्ट्री (आनर्स) के तृतीय वर्ष का छात्र शुभम सिंह सोमवार को अपनी दादी धिनाई देवी का हॉस्पिटल में इलाज कराने गया था। तबीयत ज्यादा खराब होने पर छात्र और परिवारीजनों ने डॉक्टरों से मरीज को जल्दी देखने का आग्रह किया। छात्र का आरोप है कि फिर भी लेबर रूम में मौजूद डॉक्टरों ने मरीज को नहीं देखा। छात्र का आरोप है कि डॉ. मीत मिनारे ने कुछ सहयोगी चिकित्सकों के साथ मिलकर उसकी पिटाई भी की है।
उधर, डॉक्टरों का कहना है कि छात्र अपने परिवारीजनोें के साथ लेबर रूम में घुसने की कोशिश कर रहा था। लेबर रूम में पुरुष नहीं जा सकते हैं। बावजूद इसके छात्र परिवार के सदस्यों के साथ वहां पहुंच गया और हंगामा करने लगा। छात्र और उसके परिवारीजनों के खिलाफ जूनियर डॉक्टरों ने प्राक्टोरियल बोर्ड में शिकायत करने के साथ-साथ लंका थाने में प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए चीफ प्राक्टर को शिकायती पत्र लिखा है। बताया जाता है कि छात्र और उसके परिवारीजनों ने डॉक्टरों के साथ दुर्व्यवहार करने पर अफसोस जताते हुए लिखित माफीनामा भी दिया था। मामला खत्म समझ लिया गया था लेकिन देर रात जूनियर डॉक्टर ने लंका थाने में छात्र और परिवारीजनों के खिलाफ तहरीर दे दी। तहरीर की सूचना मिलने पर छात्र उग्र हो उठे। हालांकि डॉक्टर की तहरीर पर मुकदमा दर्ज नहीं हुआ है।