इस सिस्टम को हॉस्टल के प्रशासनिक संरक्षक डॉ. धीरेंद्र राय और उनके छात्रों की टीम ने तैयार किया है, जिसमें आईआईटी बीएचयू के वैज्ञानिक प्रो. वी कुमार की मदद ली गई है। हॉस्टल के वॉलीबॉल कोर्ट, दो बैडमिंटन कोर्ट, दर्जनों सीटिंग बेंच सहित परिसर में छोटे बड़े कुल नौ उद्यान में कहीं भी जलभराव नहीं था। इन सब काम को बिना किसी सरकारी वित्तीय मदद के छात्रों के साथ मिलकर किया गया।
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840 ट्रक मिट्टी और सात हजार ईंटें लगवाईं
डॉ. धीरेंद्र राय ने बताया कि यह सब हॉस्टलर्स और यहां के लोगों की वजह से संभव हो पाया है। छात्रावास के छात्रों और कर्मचारियों के साथ मिलकर पांच वर्ष पहले ही लैंडस्केपिंग, गार्डनिंग, प्लांटेशन और जलनिकासी पर बहुत कार्य किया। सात महीने तक काम चला। इसमें कुल 840 ट्रक मिट्टी और 7000 ईंटें लगीं। आईआईटी बीएचयू के प्रो. वी कुमार ने इस स्ट्रक्चर डिजाइनिंग में मदद की थी। छुट्टी में सभी छात्र जुटते थे और इस काम को पूरा करते थे। ये काम सामूहिक और व्यक्तिगत प्रयासों से पूरा हुआ।