छात्रों के मुताबिक, भर्ती के करीब 12 घंटे बाद घायल छात्र को डिस्चार्ज करने की बात सामने आई। इसके बाद छात्र घायल को स्ट्रेचर पर लिटाकर ट्रॉमा सेंटर से बाहर ले आए। पोर्टिको के बाहर छात्रों और प्रॉक्टोरियल बोर्ड के अधिकारियों के बीच धक्कामुक्की हुई। मामला बढ़ने पर हाथापाई की स्थिति बन गई। इसके बाद कई छात्र ट्रॉमा सेंटर के बाहर धरने पर बैठ गए, जबकि घायल छात्र स्ट्रेचर पर ही रहा।
काफी देर तक चली बातचीत के बाद छात्रों ने घायल को दोबारा ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया। छात्रों का दावा है कि इसके बाद घायल के घाव पर 29 टांके लगाए गए। छात्रों ने पूरे प्रकरण की जांच की मांग की है।
छात्रों ने इलाज की पूरी मेडिकल टाइमलाइन और अस्पताल के रिकॉर्ड की जांच, कर्मचारियों व सुरक्षाकर्मियों पर लगाए गए दुर्व्यवहार के आरोपों की जांच तथा घायल छात्र को उसकी स्थिति के अनुरूप पूर्ण और आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की है। मामले में अस्पताल प्रशासन का पक्ष सामने नहीं आया है।