पीएचडी प्रवेश न मिलने से नाराज हिंदी विभाग की छात्रा गुरुवार को सेंट्रल ऑफिस पर धरना देने पहुंची। छात्रा अर्चिता सिंह ने आरोप लगाया कि विभाग में प्रोफेसर अपने प्रिय छात्र के प्रवेश के चक्कर में हैं, ऐसे में एडमिशन फीस जमा करने का लिंक उसे नहीं भेजा गया। जबकि काउंसिलिंग और दस्तावेज बाकी प्रक्रिया पूरी थी। ईडब्ल्यूएस सर्टिफिकेट नहीं था तो पहले पुराना लगाया, बाद में विभाग के कहने पर अंडरटेकिंग फॉर्म भी जमा कर दी।
अर्चिता ने कहा कि वह हिंदी विभाग से ही यूजी और पीजी की है। इस बार पीएचडी प्रवेश के लिए सामान्य कटेगरी में 15वीं रैंकिंग है। इस दौरान पता चला कि विभाग पेमेंट लिंक भेजने की तैयारी में है, लेकिन बाद में प्रवेश कराने के लिए एडमिशन प्रक्रिया रोकी गई। मेरे पास आने वाले पेमेंट लिंक को रोका गया और विभाग द्वारा एक कमेटी बना दी गई।
छात्रा का आरोप है कि बाद में कमेटी ने इस मामले को दूसरे छात्र का प्रवेश कराने के उद्देश्य से यूएसएबी को भेज दिया गया। वहां की चेयरमैन ने मेरी समस्याओं के निराकरण से मना कर दिया। वहीं अधिकारियों की ओर से कहा गया कि ईडब्ल्यूएस का नया सर्टिफिकेट जमा कर दो। छात्रा का कहना है कि विभाग में कई अभ्यर्थियों ने अंडर टेकिंग फॉर्म ही जमा करके प्रवेश पा लिया है। ऐसे में मेरे ही प्रवेश से क्या दिक्कत है।