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बीएचयू की छात्रा का गजब का शोध: तुलसी और फूलों के बीज से बनेगी पैकिंग सामग्री, उगा सकेंगे पौधे

Tue, 19 Sep 2023 05:32 PM IST
किरन रौतेला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

काशी के हस्तशिल्प कलाकार विदेशों में सामान भेजते हैं, लेकिन 15 से 17 प्रतिशत सामान टूट फूट जाते हैं। इसका खामियाजा आर्टिजन के कारिगरों को भुगतना पड़ता है। अब उद्यमियों को इस समस्या से मुक्ति मिल जाएगी।
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बीएचयू की शोध छात्रा श्रृष्टि द्वारा निर्मित हस्त कला पैकिंग माडल बनाया गया - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बीएचयू दृश्य कला संकाय की छात्रा सृष्टि प्रजापति ने हस्तकला उत्पादों के पैकेजिंग डिजाइन पर शोध किया है। उन्होंने पर्यावरण के अनुकूल, किफायती और सुविधाजनक पैकेजिंग मॉडल ईजाद किया है। यह शोध उपभोक्ताओं तक सुरक्षित तरीके से ब्रांड बनारस को पहुंचाने में सहायक होगा। ये इको-फ्रेंडली पैकिंग मटेरियल सस्ता होने के साथ वस्तुओं को लाने और ले जाने में सुविधा जनक है। क्राफ्ट निकालने के बाद कवर काे फिर से यूज किया जा सकता है। इससे अनावश्यक कचरा नहीं होगा। सामान निकालने के बाद पैकिंग सामग्री को खाद के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकेगा। इन सामाग्रियों को तुलसी और फूलों के बीज से बनाया जाएगा। इसकी मदद से लोग गमले में पौधे उगा सकेंगे।

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काशी के हस्तशिल्प कलाकार विदेशों में सामान भेजते हैं, लेकिन 15 से 17 प्रतिशत सामान टूट फूट जाते हैं। इसका खामियाजा आर्टिजन के कारिगरों को भुगतना पड़ता है। अब उद्यमियों को इस समस्या से मुक्ति मिल जाएगी। इस शोध से काशी के उद्यमियों और कारीगरों को सहूलियत होगी। सृष्टि ने बताया कि अगर सही पैकेजिंग हो तो वस्तु आसानी से अच्छी कीमत पर बिकती है। ये पैकेजिंग पर्यावरण के अनुकूल होगा। इसमें कबाड़ और फिर से इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं का प्रयोग होगा।

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बीएचयू की शोध छात्रा द्वारा निर्मित हस्त कला पैकिंग मॉडल बनाया गया - फोटो : अमर उजाला
हस्त शिल्पियों को होगा फायदा
शोध गाइड मनीष अरोरा ने बताया कि यह पैकेजिंग डिजाइन काशी के हस्त शिल्पकारों के लिए फायदेमंद होगा। अब तक उद्यमी उत्पाद को कार्टून या कागज में लपेट कर, पुआल के बीच रखकर भेजते थे। इसमें बड़ी मात्रा में हस्तशिल्प को नुकसान पहुंचता थाा।
हस्तशिल्प को टूटने-फूटने से बचाएगी पैकिंग

हश्तशिल्प की स्किन पैकिंग के बाद उत्पाद को एक सांचे में पैक किया जाएगा। हिलने, डुलने और दबाव पड़ने के बाद भी सामान पूरी तरह सुरक्षित रहेगा। इससे वस्तु की अच्छी कीमत मिलेगी। कम डैमेज होने से उत्पादन में लाभ होगा।
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