अध्ययन में जिन युवा प्रतिभागियों को शामिल किया गया, वह सामान्यतः फल, सब्जियां, दालें, अनाज और कम प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों को स्वस्थ मानते थे, जबकि गहरे तेल में तले हुए और अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों को अस्वस्थ मानते थे। अध्ययन में एक महत्वपूर्ण अंतर सामने आया कि किसी भी युवा प्रतिभागी ने नहीं बताया कि वह भोजन को स्वस्थ या अस्वस्थ तय करने के लिए पोषण लेबल या स्वास्थ्य संबंधी दावों पर निर्भर करता है।
फल और ऑर्गेनिक खाद्य पदार्थों सहित पौष्टिक खाद्य पदार्थों को अक्सर महंगा माना गया, जबकि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड और जंक फूड को अपेक्षाकृत सस्ता और आसानी से उपलब्ध विकल्प माना गया। अध्ययन करने वाली टीम में प्रो. ललिता वट्टा के साथ दो पीजी छात्राएं फरहीन, शिखा और डीकिन यूनिवर्सिटी ऑस्ट्रेलिया के प्रो. एंथनी वॉर्सली, अहमदाबाद यूनिवर्सिटी से प्रो. नेहा राठी, शामिल रहीं।