काशी हिंदू विश्वविद्यालय भदोही में वस्त्र संस्थान की स्थापना करेगा। छात्रों को वस्त्र और कालीन उद्योग के लिए तैयार किया जाएगा। इस संस्थान में शोध कार्य भी होंगे। सरकार ने संस्थान स्थापित करने के लिए बीएचयू को हरी झंडी दे दी है।
भदोही के सांसद वीरेंद्र सिंह ‘मस्त’ ने चार दिवसीय 34वें कालीन मेले के समापन के अवसर पर शुक्रवार को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कालीन नगरी भदोही में भेड़ के बालों से तैयार ऊन से भी कालीन बनाई जाती है।
इसलिए केंद्र सरकार बुनकरों को रोजगार देने के लिए उन्हें भेड़ पालन से जोड़ना चाहती है। इससे बुनकर ही कालीन उद्योग को कच्चा माल उपलब्ध करा सकेंगे। इसके लिए सरकार उन्हें 10 लाख रुपए तक की धनराशि भी उपलब्ध कराएगी।
कालीन बुनकरी को पुश्तैनी काम का दर्जा दिया जाएगा। यह एक उद्योग ही नहीं बल्कि पुश्तैनी परंपरा और संस्कृति भी है। सांसद ने बताया कि भदोही में टेक्सटाइल पार्क स्थापित करने की योजना पर भी सरकार काम कर रही है।
निर्यातकों को 337.2 करोड़ का ऑर्डर
बुनकर
कालीन निर्यात संवर्द्धन परिषद के अध्यक्ष महावीर शर्मा ने कहा कि केंद्र सरकार की वस्त्र नीति में कालीन बुनकरों के लिए कोई खास जगह नहीं है। इसीलिए परिषद ने कालीन बुनकरों के हित में आवाज उठाई है।
नीति संशोधित कर कालीन उद्योग के अनुकूल बनाने के लिए वस्त्र मंत्रालय को पत्र लिखा है। उन्होंने बताया कि वैश्विक मंदी के बावजूद मेले में पहली बार नए देशों को फोकस किया गया
जिसका असर मेले पर दिखाई पड़ा। मेले में सबसे अधिक आयातक अमेरिका से आए। नए देशों में चिली, अर्जेंटीना, जापान, मैक्सिको, नीदरलैंड, पोलैंड, रोमानिया के आयातकों ने अपनी जरूरत बताई।
58 देशों से आए चार सौ से अधिक खरीदारों ने भाग लिया और इन चार दिनों में लक्ष्य से कम 337.2 करोड़ का ऑर्डर मिला तो 2857 करोड़ के कालीन निर्यात के लिए पूछताछ हुई है।