‘आपकी बेटी धरना-प्रदर्शन कर सकती है तो स्टेशन पर रात भी गुजार सकती है।’ ये त्रिवेणी संकुल की एक संरक्षिका के बोल हैं। एक छात्रा ने जब बेबसी के साथ अपने पिता से फोन पर संरक्षिका से बात कराई और पिता ने उनसे ये कहा कि बेटी का रिजर्वेशन सोमवार का है।
ऐसे में वो आज कहां जाएगी, तो संरक्षिका ने उन्हें ये दो टूक कहकर चुप करा दिया। दरअसल, बीएचयू में शनिवार रात हुए बवाल के कारण 28 सितंबर से होने वाली दशहरा की छुट्टियां बढ़ाकर 25 सितंबर से कर दी गईं। साथ ही हॉस्टल खाली करने का भी निर्देश दो दिया गया।
विश्वविद्यालय की ओर से किसी भी तरह का कोई सर्कुलर तो जारी नहीं किया गया लेकिन सभी से हॉस्टल खाली कराने को कह दिया गया। इसी तरह एमएमवी की छात्राओं से चीफ वार्डन ने हॉस्टल खाली करके जाने को कहा तब छात्राओं ने यही कहा कि इतने कम समय में वो हॉस्टल कैसे खाली कर सकती हैं। यहां पर तो हास्टल की संरक्षिका ने छात्राओं का साथ दिया।
उन्होंने कहा कि मैं अपनी छात्राओं को हॉस्टल खाली करने को नहीं कहूंगी। जिस तरह से प्रशासन ने रात में बच्चियों पर लाठियां चलाईं, उसी तरह प्रशासन खुद ही हॉस्टल खाली करा ले। बीए की छात्रा शिवांगी ने कहा कि लड़कियों से जबरदस्ती हॉस्टल खाली कराया जा रहा है।
घरवाले ही चिंता में मुझे लेने आ गए हैं, जा रही हूं। अब जब माहौल शांत होगा तभी वापस आऊंगी। वहीं बीकॉम की छात्रा दीपिका ने कहा कि पूरे हॉस्टल में दहशत का माहौल है। कोई कह रहा है बनारस बंद होने वाला है। मम्मी-पापा ने बुला लिया है और हॉस्टल भी खाली करने को कह दिया गया है।
तुगलकी फरमान से और परेशान हो उठीं छात्राएं
बीएचयू में दिनभर मची रही अफरा तफरी
- फोटो : अमर उजाला
बीएचयू में उपद्रव के बाद रविवार को छात्राओं को हॉस्टल खाली करने का मौखिक फरमान सुना दिया गया। शाम चार बजे तक हॉस्टल खाली करने को कहा गया। 28 सितंबर से होने वाली दशहरा की छुट्टियां बढ़ाकर 25 सितंबर से कर दी गईं।
आननफानन में हॉस्टल खाली कराए जाने से छात्राओं को खासी दिक्कतें उठानी पड़ीं। जिन छात्राओं ने दशहरे की छुट्टी में घर जाने की तैयारी की थी, उनका भी रिजर्वेशन आगामी तिथियों में था। बावजूद इसके उन्हें सामान समेटकर निकलना पड़ा।
कई छात्राओं के परिवारीजन उन्हें लेने आए थे तो कई ने दोस्तों-परिचितों की मदद ली। त्रिवेणी संकुल के छह हॉस्टल समेत महिला महाविद्यालय के सभी हॉस्टलों से छात्राएं अपना सामान लेकर घर रवाना होती रहीं। उपद्रव के दौरान छात्राओं पर लाठीचार्ज की चौतरफा निंदा के बीच अचानक हॉस्टल खाली करने के फरमान ने छात्राओं की मुसीबत और बढ़ा दी।
हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि उसकी तरफ ऐसा कोई अधिकृत निर्देश जारी नहीं किया गया है। वहीं, हॉस्टलों से अपने-अपने सामान समेटकर निकलतीं छात्राओं का कहना था कि उन्हें शाम चार बजे तक हर हाल में हॉस्टल खाली करने को कहा गया है।
उधर, बवाल की खबर सुनकर कई अभिभावक सुबह तक अपनी बेटियों को लेने हॉस्टल पहुंच गए थे। सबसे अधिक परेशानी उन छात्राओं को हुई, जिनके घर राजस्थान, छत्तीसगढ़, बिहार, कोलकाता सहित अन्य प्रांतों में हैं।
हॉस्टलों में रात की ‘चीख पुकार’ का शोर
बीएचयू में शनिवार की रात जमकर हुआ था बवाल
- फोटो : अमर उजाला
बीएचयू में शनिवार रात हुए बवाल की चीख-पुकार रविवार को भी हॉस्टलों में गूंजती रही। एमएमवी से लेकर त्रिवेणी संकुल, नवीन हॉस्टल से लगायत सभी गर्ल्स हॉस्टल में छात्राओं ने जहां डर-सहम कर रात गुजारी, वहीं रात की ‘चीख पुकार’ से मन में विद्रोह का ज्वाला और भी दहका।
सोशल मीडिया पर छात्राओं पर हुए लाठी चार्ज के वायरल हुए वीडियो को देख अन्य छात्राएं भी आक्रोशित हो उठीं। फेसबुक और व्हाट्सएप पर उन्होंने अपने गुस्से का इजहार किया।
सवाल उठाया कि लड़कियों पर लाठीचार्ज कर पुलिस अपना कैसा पुरुषार्थ दिखा रही थी? उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन पर भी सवाल उठाया कि आखिर कैसे वो अपनी ही छात्राओं के प्रति इतना संवेदनहीन हो सकता है।
लेकिन, अफसोस विश्वविद्यालय प्रशासन को कोसने के अलावा उनके पास कुछ नहीं था। उल्टा उन्हें तो हॉस्टल खाली करके जाने की चिंता सता रही थी।