बीएचयू में बवाल के मामले में प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजी गई प्रारंभिक रिपोर्ट में संवादहीनता और लापरवाही को बड़ी वजह बताया गया है।
कहा गया है कि बीएचयू प्रशासन ने अगर धरने के पहले दिन ही छात्र-छात्राओं से संवाद किया गया होता तो परिसर में उपद्रव के हालात नहीं बनते। संवाद न होने से नाराजगी बढ़ गई और आंदोलन बढ़ गया।
यह भी बताया गया है कि कानून व्यवस्था ठीक होने और धरना शांतिपूर्ण होने का दावा करते हुए प्रशासनिक अधिकारियों ने भी पूरे मामले से दूरी बनाए रखी। जिला प्रशासन ने भी यदि शुरुआत में ही बीएचयू प्रशासन से वार्ता कर हल निकालने की कोशिश की होती तो छात्राओं की सुरक्षा की मांग को लेकर शुरू हुआ आंदोलन उग्र नहीं होता।
शनिवार रात परिसर हुए पथराव, लाठीचार्ज, बमबाजी, आगजनी और फायरिंग के मामले में प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने रविवार को प्रशासन से रिपोर्ट मांगी थी। इसी मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने छात्र-छात्राओं पर लाठीचार्ज की घटना की जांच कराने का निर्देश कमिश्नर नितिन रमेश गोकर्ण को दिया है। उनसे मीडियाकर्मियों की पिटाई पर भी रिपोर्ट मांगी गई है।
माना जा रहा है कि रविवार देर शाम भेजी गई रिपोर्ट के आधार पर जल्दी ही कुछ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों पर गाज गिर सकती है। बीएचयू से जुड़े कुछ अधिकारियों पर भी कार्रवाई की संभावना है।
पूरे मामले में मुख्यमंत्री ने प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार और प्रमुख सचिव सूचना अवनीश अवस्थी से जानकारी लेने के बाद कमिश्नर को रिपोर्ट देने और जांच कराने का निर्देश दिया गया। इस पर कमिश्नर दोपहर करीब डेढ़ बजे बीएचयू पहुंचे।
पांच बजे तक उन्होंने बीएचयू प्रशासन, जिला प्रशासन एवं पुलिस अधिकारियों के अलावा कैंपस में मौजूद कुछ छात्र-छात्राओं से भी बातचीत की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र का मामला होने के कारण पीएमओ समय-समय पर अपडेट ले रहा है।मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने भी विश्वविद्यालय प्रशासन से रिपोर्ट तलब की है।