बीएचयू में 21 सितंबर को छात्रा संग छेड़खानी के बाद 23 सितंबर को लाठीचार्ज की घटना के एक माह बाद अलग-अलग गठित जांच कमेटियों में किसी की रिपोर्ट अभी तक फाइनल नहीं हो सकी है। यही नहीं, जिस छात्रा के साथ 21 सितंबर को भारत कला भवन के समीप छेड़खानी हुई थी और फिर बवाल हुआ, उस मामले में पुलिस किसी आरोपी को गिरफ्तार करना तो दूर महीने भर बाद उन्हें चिह्नित भी नहीं कर सकी है।
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मामले की मजिस्ट्रेटी जांच कर रहे एडीएम प्रशासन एमएन उपाध्याय अगले महीने अपनी रिपोर्ट डीएम योगेश्वर राम मिश्रा को देंगे। फिलहाल, वह जांच दर्ज कराए गए बयानों का अध्ययन कर रहे हैं। सूत्रों की मानें तो बीएचयू की छात्राओं ने अपने बयान में सबसे पहले बीएचयू प्रशासन को जिम्मेदार बताया है। कहा है कि सबसे पहले बीएचयू के सुरक्षाकर्मियों ने लाठीचार्ज किया था जिससे माहौल बिगड़ा। इसके बाद पुलिस ने भी छात्र और छात्राओं पर लाठीचार्ज किया था। छात्रों ने लाठीचार्ज से संबंधी सीडी भी एडीएम को सौंपी है।
इस बीच बीएचयू बवाल के संबंध में लंका थाने में छात्रों के खिलाफ दर्ज मुकदमों को वापस लेने के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की घोषणा के बाद भी पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों के पास कोई आदेश नहीं आया। वहीं, बीएचयू बवाल से संबंधित दर्ज मामलों की क्राइम ब्रांच द्वारा की जा रही जांच के बारे में एसपी क्राइम ज्ञानेंद्र नाथ प्रसाद ने बताया कि विवेचना में समय लगेगा। फिलहाल बयान दर्ज किए जा रहे हैं।
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परिसर में त्रिवेणी हॉस्टल की छात्रा के साथ 21 सितंबर की शाम छह बजे छेड़खानी के बाद 22 सितंबर को छात्राएं धरने पर बैठी और कुलपति को बुलाने की मांग पर अड़ी रही। 23 सितंबर की शाम तक जब कुलपति नहीं गए तो वह आवास पहुंच गई और वहां भी धरना देने लगी।
रात करीब सवा दस बजे सुरक्षा गार्डों ने लाठीचार्ज किया, जिसके बाद माहौल बिगड़ा और पूरी रात आगजनी, तोड़फोड़ चलती रही। इसी बीच महिला महाविद्यालय में पीएसी जवानों ने छात्राओं पर लाठीचार्ज कर दिया था।
उधर, अब तक जस्टिस वीके दीक्षित की अध्यक्षता वाली कमेटी, महिला आयोग की टीम और प्रदेश सरकार की ओर से अपर मुख्य सचिव आरपी सिंह विश्वविद्यालय आकर जांच कर चुके हैं। इस दौरान छात्र-छात्राओं के साथ ही अधिकारियों के बयान दर्ज किए गए थे।
रैगिंग के दो मामलों की जांच पूरी
बीएचयू
- फोटो : अमर उजाला
बीएचयू परिसर में अगस्त से हुई चार घटनाओं में दो मामलों की जांच पूरी हो चुकी है। विश्वविद्यालय की एंटी रैगिंग सेल ने मामले की रिपोर्ट तैयार कर ली है। इसमें अगस्त माह के अंतिम सप्ताह और आठ सितंबर को हुई घटना शामिल हैं। उधर, 13 अक्तूबर को फिजी के छात्र के साथ हुई रैगिंग के मामले की जांच एक सप्ताह के भीतर पूरी हो जाएगी।
अगस्त के दूसरे सप्ताह में पहली घटना हुई थी, जिसमें सीनियर छात्रों ने जूनियर संग रैगिंग की थी, उसकी जांच चल रही थी। इसके बाद अंतिम सप्ताह में सोशल साइंस की छात्रा ने छात्र द्वारा रैगिंग की शिकायत की गई थी।
एंटी रैगिंग सेल की रिपोर्ट के आधार पर आरोपी छात्र को निलंबित कर दिया गया। तीसरी घटना आठ सितंबर को कला संकाय में एक छात्रा के साथ रैगिंग हुई। इसकी जांच अब तक लंबित है जबकि चौथी घटना फिजी निवासी छात्र मुनीस क्रिसनील सामी के साथ हुई थी।
छात्रावासों में पहुंचे अधिकारी
विश्वविद्यालय के छात्रावासों में छात्र-छात्राओं की समस्या जानने के लिए अब अधिकारियों की टीम छात्रावासों में पहुंचेगी। सोमवार को पहले दिन कुलसचिव डॉ. नीरज त्रिपाठी, छात्र अधिष्ठाता प्रो. एमके सिंह, चीफ प्रॉक्टर प्रो. रोयाना सिंह आदि लोग क़ृषि विज्ञान संस्थान, विधि विभाग के छात्रों के छात्रावास पहुंचे।
यहां उन्होंने सुरक्षा, मूलभूत सुविधाओं आदि के मामले में छात्र-छात्राओं से बातचीत की। इस दौरान जो समस्याएं सामने आई, उसका तत्काल समाधान कराने का आश्वासन भी दिया।
पावगी हॉस्टल की ऊंची हो रही दीवार
परिसर के जोधपुर कॉलोनी में बने पावगी हॉस्टल की दीवार ऊंची कराई जाने लगी है। पिछले दिनों आधी रात को एक युवक के हॉस्टल में कूदने की घटना के बाद यह कदम उठाया गया है।
हॉस्टल के पिछले दीवाल से वह कूदकर अंदर घुसा था कि छात्राओं ने हंगामा मचाया और उसे दौड़ा लिया था। वैसे भी सुरक्षा के लिहाज से यहां मुख्य द्वार पर सीसीटीवी कैमरा लगा है लेकिन पिछले हिस्से में दीवार बहुत नीची थी।
सुरक्षा और मुआवजे के लिए कर्मचारियों-छात्रों का हंगामा
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय
- फोटो : अमर उजाला
दीपावली के बाद खुले बीएचयू में सोमवार को कर्मचारियों और छात्रों ने अलग-अलग मांगों को लेकर हंगामा किया। केंद्रीय कार्यालय में जहां सुरक्षा की मांग पर कर्मचारियों ने कामकाज ठप रखकर नाराजगी जाहिर की वहीं सोमवार को नदी में डूबने से मृत बीए के छात्र की मौत पर मुआवजे को लेकर छात्रों ने हंगामा किया।
केंद्रीय कार्यालय के परीक्षा विभाग में कार्यरत कुछ कर्मचारियों ने छात्रों पर कार्यालय में घुसकर दबाव में काम कराने का आरोप लगाया। बताया कि इस वजह से काम करना तो दूर कार्यालय में बैठना मुश्किल हो गया है। हालांकि इस तरह की स्थिति तीन-चार दिनों से चली आ रही थी, जब बात नहीं बनी तो सोमवार को केंद्रीय कार्यालय खुलने पर परीक्षा नियंता विभाग के कर्मचारियों ने कामकाज ठप कर हंगामा शुरू कर दिया।
इस वजह से करीब घंटे भर तक कामकाज प्रभावित रहा। सूचना पाकर मौके पर पहुंची चीफ प्रॉक्टर प्रो. रोयाना सिंह ने बातचीत की, जिस पर कर्मचारियों ने सुरक्षा कड़ी करने, कार्यालय अंदर से बंद करवाने की मांग की। सुरक्षा बढ़ाने का आश्वासन पर कर्मचारी काम पर लौटे।
उधर, रोहनिया के शूल टंकेश्वर स्थित नदी में नहाने गए बीए की छात्र की रविवार शाम मौत के बाद सोमवार को उसका पोस्टमार्टम कराया गया। पोस्टमार्टम हाउस पर कुलसचिव डॉ. नीरज त्रिपाठी, छात्र अधिष्ठाता प्रो. एमके सिंह, चीफ प्राकटर आदि लोग पहुंचे।
विश्वविद्यालय के नियमानुसार परिवारीजनों को पांच हजार रुपये दिए जा रहे थे। इस दौरान वहां मौजूद कुछ छात्रों ने उसे और धनराशि दिए जाने को लेकर हंगामा किया। इस पर विश्वविद्यालय की ओर से दी जाने वाली राशि 10 हजार कर दी गई। बाद में विश्वविद्यालय ने छात्र के शव को विश्वविद्यालय वाहन से घाट तक भिजवाया, जहां परिजनों ने अंतिम संस्कार किया।