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BHU: प्रो. एचसी वर्मा बोले- 10 साल तक नहीं देखा स्कूल, छठी से नौवीं तक चार बार हुआ फेल; एक घंटे तक दिया लेक्चर

Sat, 18 Apr 2026 11:37 AM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: एचसी वर्मा ने आईआईटी कानपुर के इमेरिटस फैकल्टी के रूप में बीएचयू में छात्रों को संबोधित किया। उन्होंने असफलताओं से सीखकर आगे बढ़ने और अंकों के बजाय ज्ञान पर ध्यान देने की प्रेरणा दी। कुलपति अजित कुमार चतुर्वेदी ने मातृभाषा में विज्ञान के महत्व पर जोर दिया।
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आईआईटी कानपुर के इमेरिटस फैकल्टी प्रो. एचसी वर्मा ने दिया लेक्चर। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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IIT BHU: भौतिक विज्ञान के प्रख्यात शिक्षक और आईआईटी कानपुर के इमेरिटस फैकल्टी प्रो. एचसी वर्मा ने बीएचयू के महामना हॉल में शुक्रवार को एक हजार छात्र-छात्राओं से संवाद किया। हालिया जारी सीबीएसई 10वीं के रिजल्ट को आधार बनाकर छात्र-छात्राओं को मोटिवेट किया। एक घंटे के लेक्चर ने उन्होंने कहा कि रिजल्ट आने के बाद सिर्फ नंबरों की ही चर्चा है। एक मैं था कि 10 साल की उम्र तक स्कूल ही नहीं गया। पिता ने सीधे ही छठी कक्षा में प्रवेश करा दिया, लेकिन छह से लेकर नौवीं कक्षा तक हर साल दो या तीन विषयों में चार-चार बार फेल हुआ। पास होना क्या होता है पता ही नहीं था। 

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एक दिन मां ने पारदर्शी जार में ठेकुआ रख दिया और कहा कि यहां पर एक घंटे सिर्फ बैठ जाओ तो ठेकुआ खाने को दूंगी। पढ़ने की शर्त नहीं थी। मैं शर्त स्वीकार कर वहां बैठा तो पांच मिनट में ही ऊब गया। फिर बगल में रखी किताब पढ़ने लगा। तब समझ आया कि पढ़ाई बहुत काम की चीज है। यहां से फिर जो सफर शुरू हुआ तो मैं कभी नंबर और पैसे के पीछे नहीं भागा। 

मैं आईआईटी जाने की जिद मन में पाल बैठा। जेईई न देकर मैंने बीएससी किया और उसी आईआईटी में छात्र बनने के बजाय प्रोफेसर बनकर गया। 70 के दशक में इंजीनियर बनने का वेतन 5000 रुपये महीना था लेकिन मैंने 700 रुपये वाली शिक्षक की नौकरी चुनी। 

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विज्ञान का प्रसार मातृभाषा में हो : कुलपति प्रो. चतुर्वेदी
बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि मातृभाषा में विज्ञान का प्रसार ही समाज में वैज्ञानिक विचारों को विकसित करता है। विज्ञान संकाय के संकाय प्रमुख प्रो. राजेश कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि प्रो. वर्मा जैसे शिक्षक का बीएचयू के प्रांगण में होना विज्ञान के विद्यार्थियों के लिए किसी तीर्थ से कम नहीं है। निदेशक प्रो. संजय कुमार और प्रो. मधु तपाड़िया ने छात्र और छात्राओं से संवाद कर प्रो. वर्मा का गर्मजोशी के साथ स्वागत किया।
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अचिंत्य 5.0 : महिला विशेषांक का हुआ लोकार्पण
इस दौरान जंतु विज्ञान की ओर से प्रकाशित विज्ञान पत्रिका अचिंत्य 5.0: महिला विशेषांक का लोकार्पण किया गया। इसका तीन भाषाओं बांग्ला, तमिल और अंग्रेजी भी अनुवाद किया गया है।  हिंदी प्रकाशन समिति की ओर से आयोजन समिति के सदस्य डॉ. चंद्रशेखर पति त्रिपाठी और ज्ञान लैब के प्रमुख प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे मौजूद रहे।

एआई नहीं दिमाग इस्तेमाल करो, इसके पास सबका जवाब है : प्रो. एचसी वर्मा ने एआई को घेरा, कहा कि आपके दिमाग को ये कुंद बना रहे हैं। हर चीज का जवाब एआई के पास आपके दिमाग के पास भी है। उसका ज्यादा इस्तेमाल करें नहीं एआई नुकसानदेह साबित होगा। प्रकृति के नियमों को समझने में जेंडर कभी बाधा नहीं रहा। विज्ञान रटने की नहीं, बल्कि प्रकृति को महसूस करने और सवाल पूछने की विधा है। उन्होंने छात्र-छात्राओं से कहा कि आप किताबों से बाहर निकलिए और अपने आसपास की दुनिया को भौतिकी के चश्मे से देखिए। सीखना खुद से है। किसी के दबाव में नहीं। अपनी शक्तियों को कभी कम करके न आंकें और पैकेज के पीछे न भागें। 
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