काशी हिंदू विश्वविद्यालय में हिंदी लेखन को बढ़ावा देने की रफ्तार बेहद धीमी है। शिक्षकों, अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए संचालित ‘हिंदी में मौलिक पुस्तक लेखन पुरस्कार योजना’ के तहत दो साल में महज तीन प्रविष्टियां मूल्यांकन समिति के पास पहुंचीं। पिछले वर्ष से शुरू योजना के तहत प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कार की खातिर चयन के लिए पहले वर्ष एक भी हिंदी भाषा में लिखी गई किताब समिति के पास नहीं पहुंची। प्रविष्टियों की संख्या शून्य होने के कारण मूल्यांकन ही नहीं हो पाया। इस बार मूल्यांकन समिति के पास तीन किताबें ही पहुंचीं।
मूल्यांकन समिति को उन्हीं में से प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कार के लिए चुनना पड़ा। इसमें विवेक सिंह की पुस्तक ‘उत्तर सत्यवाद’ को प्रथम पुरस्कार 50 हजार रुपये, प्रो. मुरली पालीवाल की पुस्तक ‘चरकतत्वप्रदीपिका’ को द्वितीय पुरस्कार 30 हजार और डॉ. रामकेवल व प्रो. एसवीएस राजू की पुस्तक ‘देश की आत्मनिर्भरता में मधुमक्खी पालन की भूमिका’ को 20 हजार रुपये के तृतीय पुरस्कार के लिए चुना गया।
चार सदस्यीय मूल्यांकन समिति के सदस्य सचिव डॉ. विचित्र सेन गुप्ता ने बताया कि पिछली बार कोई प्रविष्टि नहीं आई थी। इस बार तीन प्रविष्टियां आईं। पुरस्कार की धनराशि विश्वविद्यालय की ओर से दी जाती है। मूल्यांकन समिति में हिंदी विभाग के प्रो. सदानंद शाही अध्यक्ष, मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र के प्रो. आनंद वर्धन शर्मा और जंतु विज्ञान के प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे बतौर सदस्य हैं।