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बीएचयूः जूनियर डॉक्टरों और छात्रों में मारपीट के बाद 'महा' उपद्रव, रात भर दहशत में रहे लोग

Tue, 25 Sep 2018 10:27 AM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
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देर रात बिगड़ा माहौल, हड़ताल पर जा सकते हैं जूनियर डॉक्टर - फोटो : अमर उजाला
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जूनियर डॉक्टरों और मरीजों के परिजनों के बीच कहासुनी और हाथापाई की घटना के बाद सोमवार की रात बीएचयू परिसर का माहौल बिगड़ गया। शाम को पहले जूनियर डॉक्टरों से छात्रों ने मारपीट की उसके बाद डॉक्टरों ने छात्रों को पीट दिया। दोनों पक्षों में जमकर मारपीट हुई। फिर देर रात बवाल बढ़ गया छात्रों ने एकत्रित होकर जमकर उपद्रव किया। कई जगह पर आगजनी की।
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गाली की आवाजें, पेट्रोल बम के धमाके और पत्थर की आवाजों से पूरा परिसर रात भर दहशत में रहा। 

मंगलवार सुबह माहौल तो शांत है लेकिन पूरा कैंपस छावनी के रूप में तब्दील है। जिले के आला अधिकारी बीएचयू पहुंचे हैं और कुलपति संग बैठक कर रहे हैं। जूनियर डॉक्टर अभी तक काम पर नहीं लौटे हैं। बीएचयू अस्पताल की ओपीडी सेवा अभी  भी बंद है। 

सोमवार रात नौ बजे के करीब जूनियर डॉक्टर  व महिला मरीज के बीच नोक-झोंक से शुरू बवाल देर रात में हिसंक हो गया। मामला थाने पहुंचा और वहां भी मारपीट हो गई। प्रभारी निरीक्षक के साथ गालीगलौज और धक्कामुक्की की गई। बवाल फिर बीएचयू परिसर में फैल गया। मौके पर भारी भरकम फोर्स पहुंची और माहौल को शांत करने का प्रयास करने लगी। देर रात तक छात्र लाइट बंद करके तोड़फोड़ और गुरिल्ला युद्ध की तरह पथराव करते रहे। जिसके चलते फोर्स आगे बढ़ने में हिचकती रही। उपद्रवी छात्रों की ओर से फायरिंग भी की गई।
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अंधेरे से बस यही आवाज आ रही थी कि अबे पत्थर तैयार रखना... छोड़ना नही है किसी को। इस बीच बीएचयू के सात सौ से ज्यादा सुरक्षाकर्मी अंधेरे में गायब नजर आए।

क्यों हुआ विवाद

varanasi - फोटो : अमर उजाला
सर सुंदरलाल अस्पताल के छठवें तल पर मेल सर्जरी वार्ड में एक मरीज को भर्ती कराने को लेकर विवाद हुआ। मरीज के साथ आए छात्र ने वार्ड में मौजूद एक जूनियर डॉक्टर से बेड दिलवाने की बात कही। इस पर डॉक्टर ने बेड न होने की जानकारी दी, जिस पर नोकझोंक शुरू हो गई।

आरोप है कि इसी दौरान छात्रों ने जूनियर डॉक्टर की पिटाई कर दी और तोडफोड़ करने लगे। इस वजह से करीब आधे घंटे तक यहां अफरातफरी का माहौल बना रहा। इस बीच छात्र बाहर आए और इसकी शिकायत करने जा रहे थे कि परिसर में मेडिकल छात्रावास के बाहर कुछ लोगों ने उनकी पिटाई कर दी। छात्रों के मुताबिक मारपीट करने वालों में जूनियर डॉक्टर शामिल थे। दोनों तरफ से एक दूसरे पर मारपीट का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की गई है। 
 

अबे, पत्थर तैयार रखना... डरना नही

6 छात्र घायल, इससे पहले मारपीट में जूनियर डॉक्टरों को भी चोटें आईं - फोटो : अमर उजाला
 रुइया और बिड़ला हॉस्टल के छात्र रात 1: 45 बजे अंधेरे में एक-दूसरे पर हमले के लिए पत्थर तलाश रहे थे। अंधेरे से बस यही आवाज आ रही थी कि अबे पत्थर तैयार रखना... छोड़ना नही है किसी को। इस बीच बीएचयू के सात सौ से ज्यादा सुरक्षाकर्मी अंधेरे में गायब नजर आए।

 वीसी लॉज से बिड़ला हॉस्टल तक पथराव और अराजकता
परिसर के अंदर जूनियर डॉक्टरों और छात्रों के बीच माहौल गरमाया तो वीसी लॉज से बिड़ला हॉस्टल तक पथराव हुआ। इस बीच हॉस्टल रूट की लाइट गुल कर दी गई। सैकड़ों छात्रों का हुजूम बिड़ला चौराहे के समीप एकत्र होकर चीफ प्रॉक्टर और विश्विद्यालय प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करने लगा। पांच थानों की फोर्स और एक कंपनी पीएसी के साथ मौके पर पहुंचे एसपी सिटी दिनेश कुमार सिंह छात्रों को समझबुझाकर शांत कराने में जुटे हुए हैं।
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बीएचयू प्रशासन की अदूरदर्शिता से बार-बार हो रहा बबाल

बीएचयू की सड़कों पर बिखरा पड़ा पत्थर - फोटो : अमर उजाला
बीएचयू प्रशासन की अदूरदर्शिता के कारण विश्वविद्यालय का माहौल जब-तब खराब हो रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन हर मौके पर बेबस हो जाता है। कारण यह है कि न तो दोषियों की शिनाख्त ढंग से होती है और न ही उन पर कार्रवाई हो पाती है। हर बार जब भी परिसर में बवाल होता है, चंद छात्र ही इसके पीछे होते हैं लेकिन कार्रवाई का मौका आने पर सबको बचा दिया जाता है। 

बताया जाता है कि सोमवार देर शाम सर सुंदरलाल अस्पताल में जूनियर डॉक्टरों और मरीजों के परिजनों के बीच कहासुनी और हाथापाई की घटना के बाद माहौल सामान्य होने की तरफ था। बिड़ला हॉस्टल के छात्रों का आरोप है कि इसी दौरान चीफ प्रॉक्टर प्रो. रोयाना सिंह ने प्रॉक्टोरियल बोर्ड के सदस्यों के साथ हॉस्टल के सामने एक छात्र की पिटाई कर दी। पिटाई के बाद प्रॉक्टोरियल बोर्ड छात्र को साथ ले गया। इसके बाद ही माहौल बिगड़  गया और पथराव के साथ आगजनी की घटना होने लगी।

उधर, जब प्रॉक्टोरियल बोर्ड के सदस्यों ने परिसर के अंदर का माहौल अनियंत्रित देखा तो वे सुरक्षाकर्मियों के साथ मौके से चले गए। विश्वविद्यालय प्रशासन के इस रवैये को लेकर जिला पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों में भारी नाराजगी है।
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