छात्रों के अनुसार, जो थीसिस वापस मिली हैं, उनमें वर्ष 1990 के बाद की कोई थीसिस नहीं है। ऐसे में गायब शोध प्रबंधों की वास्तविक संख्या और उनकी विषयवस्तु को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। छात्रों का कहना है कि ज्योतिष विभाग मामले की जांच कराने और सभी थीसिस की बरामदगी की मांग पर अड़ा है।
छात्रों ने आशंका जताई कि पुरानी थीसिस बाहर पहुंचने से उनका दुरुपयोग हो सकता है। इन शोध प्रबंधों की सामग्री का इस्तेमाल करके दूसरे शोध कार्यों में नकल की जा सकती है। साथ ही, पुरानी थीसिस को नया बताकर बेचने की आशंका भी जताई गई है। इससे शोध की मौलिकता और अकादमिक गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो सकते हैं।
मामले को लेकर छात्रों ने जिम्मेदार लोगों की पहचान करने और थीसिस की बरामदगी सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि शोध प्रबंध किसी भी विश्वविद्यालय की अकादमिक धरोहर होते हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा और रखरखाव में लापरवाही गंभीर विषय है। फिलहाल, आरोपों की आधिकारिक पुष्टि और जांच के निष्कर्ष सामने आने का इंतजार है।