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बीएचयू: दो साल में घटे 274 पीएचडी धारक, 104 सीटों पर 30 ही इंटरव्यू; नहीं मिल रहे पहले जैसे दाखिले

Sun, 18 Jan 2026 12:38 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में किसी का नहीं हो रहा प्रवेश तो कोई आईआईटी मिलने के चलते पीएचडी सीट छोड़ दे रहा है। विज्ञान संकाय के केमिस्ट्री में 108 सीटें, जूलॉजी में 44 सीटें, बॉटनी में 58 सीटों पर प्रवेश होना है। 
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बीएचयू कैंपस में जाती छात्राएं। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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BHU University Varanasi: बीएचयू में पूर्वांचल और तमाम क्षेत्रों के शोधार्थियों की घटती संख्या विश्वविद्यालय की चिंता बढ़ा रही है। बीते दो साल में 274 पीएचडी धारकों (पास करने वाले) और एक साल में 155 पीएचडी धारकों की संख्या घटी है। विशेषज्ञों का मानना है कि दो साल पहले रेट परीक्षा (रिसर्च एंट्रेस टेस्ट) की व्यवस्था बंद हो जाने से विज्ञान के पीएचडी धारकों की संख्या सबसे तेज नीचे आई है। इससे पूर्वांचल और बिहार के पीएचडी शोधार्थियों की संख्या में गिरावट है। 

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कई छात्रों को प्रवेश नहीं मिल रहा और कई छोड़ कर चले जा रहे हैं। उन्हें आईआईटी सरीखे टॉप संस्थानों में पीएचडी करने का मौका मिल जा रहा है।विगत तीन साल में दीक्षांत समारोह में भी पीएचडी उपाधि धारकों की संख्या में कमी देखी गई है। 2023 के दीक्षांत में 986 पीएचडी उपाधियां, 2024 में 867 और पिछले साल दिसंबर में हुए 105वें दीक्षांत समारोह 712 पीएचडी उपाधियां दी गईं। 

इस बार 104 सीटों के मुकाबले 30 इंटरव्यू: बीएचयू में विज्ञान के विषयों से पीएचडी के लिए सीटों के मुकाबले आवेदन बेहद कम आ रहे हैं। जैसे फिजिक्स में कुल 100 सीटें थी सिर्फ 12 ने दाखिला लिया और अब 5-6 ही बचे। वहीं, इस बार 2025-26  में भी पीएचडी की 104 सीटें आईं लेकिन 30 आवेदकों ने ही इंटरव्यू दिए। विज्ञान संकाय के केमिस्ट्री में 108 सीटें, जूलॉजी में 44 सीटें, बॉटनी में 58 सीटों पर प्रवेश होना है। 

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डीयू और जेएनयू से उतार-चढ़ाव जारी: दिल्ली के दोनों शीर्ष विश्वविद्यालयों की बात करें तो 2026 में जेएनयू में 467 पीएचडी, 2025 में 798 पीएचडी और 2024 में 774 पीएचडी डिग्रियां दी गईं जबकि दिल्ली विवि में 2023 में 910 पीएचडी और 2024 में 659 पीएचडी उपाधियां दी गईं। 
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यूजीसी नेट से कठिन होता है सीएसआईआर नेट
पीएचडी से जुड़े बीएचयू के एक्सपर्ट बताते हैं कि नए पीएचडी ऑर्डिनेंस में आरईटी बंद होने के चलते काफी संख्या में आवेदक सीएसआईआर नेट क्वालिफाई नहीं कर पा रहे हैं। यह रेट परीक्षा और यूजीसी नेट से काफी कठिन माना जाता है जबकि जो छात्र क्वालिफाई कर रहे हैं वे विज्ञान में आईआईटी या कई बार डीयू-जेएनयू को ज्यादा तरजीह दे रहे हैं। कुछ प्रोफेसरों का मानना है कि आईआईटी के लैब की व्यवस्था और फेलोशिप भी ज्यादा मिलते हैं। 
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