विंध्याचल में जिस पंडा से नवनीत की आखिरी बात हुई थी, उन्हें उसने अपनी बाइक की चाबी दक्षिणा के तौर पर दी थी। इसके बाद पंडा से पैर में लगी मिट्टी को साफ करके वापस आने की बात कह कर नारियल और सिंदूर को घाट किनारे की सीढ़ियों पर ही छोड़ कर वह गंगा की ओर ही न जाने कहां चला गया।
लंका इंस्पेक्टर ने बताया कि तफ्तीश में अब तक जो तथ्य सामने आए हैं, उससे यही साबित हुआ है कि सांसारिकता से छात्र का मोहभंग हो गया था। मोक्ष प्राप्ति को ही उसने अपने जीवन का एकमात्र उद्देश्य मान लिया था। फिलहाल छात्र की पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।