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BHU: शिकायत प्रकोष्ठ की जांच पूरी, महिला प्रोफेसर की कम्प्लेन सही नहीं मिली; 3 पेज में 10 बिंदु चौंकाने वाले

Thu, 31 Jul 2025 05:46 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: ट्रॉमा सेंटर के प्रोफेसर और कर्मचारियों के बीच विवाद को लेकर महिला शिकायत प्रकोष्ठ ने अपनी जांच रिपोर्ट कुलपति को भेज दी है। अब इस दिशा में विश्वविद्यालय प्रशासन के अगले फैसले का इंतजार है।
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आईएमएस बीएचयू का ट्रॉमा सेंटर। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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IMS BHU: आईएमएस बीएचयू के ट्रॉमा सेंटर में सर्जरी विभाग के प्रोफेसर और कैंटीन कर्मचारियों के बीच विवाद में महिला शिकायत प्रकोष्ठ की जांच भी पूरी हो गई है। नौ सदस्यीय प्रकोष्ठ ने तीन पेज में दस बिंदुओं की रिपोर्ट तैयार की और कहा कि आरोप लगाने वाली महिला प्रोफेसर से आंतरिक शिकायत समिति के समक्ष मामला दर्ज कराने के लिए कहा गया था लेकिन उन्होंने तीन बार मना कर दिया। शिकायत सही नहीं मिली है।

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ट्राॅमा सेंटर में जिस वक्त विवाद हुआ था उस वक्त महिला प्रोफेसर वहां माैजूद नहीं थीं। ट्रॉमा सेंटर प्रकरण में महिला प्रोफेसर ने 27 मई को विश्वविद्यालय के महिला शिकायत प्रकोष्ठ यानी वीमेंस ग्रीवांस सेल में शिकायत कर न्याय की गुहार लगाई थी।

एनॉटमी विभाग की प्रोफेसर रोयाना सिंह की अध्यक्षता वाली नाै सदस्यीय टीम ने प्रकरण में दोनों पक्षों को सुनने के बाद 7 और 11 जुलाई 2025 को बैठक की। प्रो रोयाना ने बताया कि मामले की रिपोर्ट कुलपति को भेजी गई है। अब कुलपति स्तर से अंतिम फैसला लिया जाएगा। महिला आयोग को भी रिपोर्ट भेजी गई है।




रिपोर्ट में हैं चौंकाने वाली कई बातें
तीन पेज की रिपोर्ट में महिला शिकायत प्रकोष्ठ ने कहा कि घटना के समय महिला प्रोफेसर ट्रॉमा सेंटर परिसर के कैंटीन के पास मौजूद नहीं थीं। उनकी ड्यूटी डेंटल फैकल्टी के ऑपरेशन थियेटर में थी लेकिन वहां उनकी उपस्थिति नहीं दिखी। सर्जरी विभाग के प्रोफेसर ने विवि प्रशासन से जो शिकायत की थी उसमें अपनी पत्नी के साथ किसी अप्रिय घटना का उल्लेख नहीं किया था।
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महिला प्रोफेसर ने पुलिस की रिपोर्ट पर उठाए सवाल, शिकायत
एनीस्थीसिया विभाग की महिला प्रोफेसर ने दो दिन पहले डीसीपी काशी की ओर से एक्स हैंडल पर जारी जांच रिपोर्ट पर सवाल खड़े किए हैं। इसकी शिकायत उन्होंने डीजीपी समेत अन्य लोगों से की है। इसमें कहा है कि कई बार अनुरोध करने के बाद भी उनका बयान मजिस्ट्रेट के सामने नहीं लिया गया और फाइनल रिपोर्ट लगा दी गई। उन्होंने पुलिस के उच्चाधिकारियों से फाइनल रिपोर्ट को निरस्त कर मजिस्ट्रेट के सामने बयान दर्ज करवाने की मांग की है।

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