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BHU अस्पताल: एक जांच के लिए तीन बार लाइन, 35 मिनट के बाद आएगा नंबर; फीस-पंजीकरण के लिए अलग-अलग काउंटर

Thu, 13 Nov 2025 04:17 PM IST
अमन विश्वकर्मा रबीश श्रीवास्तव, अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: अमर उजाला की पड़ताल में बुधवार को सर सुंदरलाल अस्पताल के सीसीआई लैब के जांच काउंटर पर यह दृश्य देखने को मिला। कोई केंद्रीयकृत व्यवस्था न होने से परेशानी हो रही है।
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BHU Hospital - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बीएचयू अस्पताल में खून की एक जांच के लिए मरीज को तीन अलग-अलग काउंटर पर लाइन लगाना पड़ रहा है। ऐसे में एक जांच करवाने में मरीज का नंबर 35 मिनट बाद आता है। इस तरह की परेशानी रोज दूरदराज से आने वाले मरीज झेलते हैं। 

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बीएचयू में वाराणसी सहित आसपास के जिले और बिहार, झारखंड से रोज ओपीडी में 6000 मरीज आते हैं। सीसीआई लैब में रोज 10 हजार से अधिक जांच होती है। डॉक्टर बीमारी के हिसाब से किसी को दो तो किसी को चार जांच लिखते हैं। सीसीआई लैब में खून की जांच करवाने के लिए एक काउंटर पर फीस जमा होने, पंजीकरण की व्यवस्था न होने से मरीजों को देरी होती है।

कभी कभी जांच और फीस काउंटर, पंजीकरण काउंटर, सैंपल वाले काउंटर पर 20 से 30 मरीज लाइन में खड़े रहते हैं। ऐसे में किसी मरीज/ तीमारदार के पहुंचने पर बारी-बारी से तीनों लाइन में लगना पड़ता है। इसमें आधे घंटे लग जाते हैं। लाइन जब लंबी हो जाती है तो मरीज/तीमारदार काउंटर के बाहर रखी कुर्सियों पर खड़े होकर बारी का इंतजार करते हैं।

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यह है जांच करवाने की वर्तमान व्यवस्था : डॉक्टर अगर किसी मरीज को जांच लिखते हैं तो सीसीआई लैब में काउंटर पर जाकर पहले पैसा जमा करने के लिए लाइन में खड़ा होना पड़ता है। मरीज/ तीमारदार जब पैसा जमा कर लेते हैं तो उस रसीद को लेकर दूसरे काउंटर पर पंजीकरण के लिए लाइन में लगना पड़ता है।

फीस जमा रसीद और पंजीकरण का पर्चा लेकर अंदर जाने पर सैंपल देने के लिए भी लाइन लगानी पड़ती है। जांच के बाद रिपोर्ट लेने के लिए भी काउंटर पर लाइन लगानी होती है। फिर डॉक्टर को दिखाने पहुंचते हैं। इस तरह जांच की पूरी प्रक्रिया में 30 मिनट लग जाते हैं।

सीसीआई लैब में जांच की व्यवस्था को अपग्रेड करने की तैयारी चल रही है। एचआईएमएस यानी हॉस्पिटल इनफार्मेशन मैनेजमेंट सिस्टम के तहत एक ही काउंटर पर फीस जमा करने, पंजीकरण करवाकर बार कोड लगवाने की सुविधा रहेगी। मरीजों को मोबाइल पर रिपोर्ट भी मिलेगी। इसमें 2-3 महीने लग सकते हैं। इसके बाद मरीजों को लाइन में लगने से छुटकारा मिल जाएगा। - प्रो. एसपी मिश्रा, प्रभारी, सीसीआई लैब, बीएचयू
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केस 1- ककरमत्ता निवासी कविता पैर में दाने निकलने से परेशान थीं। डॉक्टर को दिखाया तो खून की तीन जांच लिखी। कविता बुधवार को सीसीआई लैब पहुंची। बताया कि फॉर्म लेकर पहले फीस जमा करने के लिए 5 नंबर काउंटर पर लगना पड़ा। 15 लोगों के बाद नंबर आया था। किसी तरह फीस जमा करने के बाद फिर 1 नंबर काउंटर पर पंजीकरण के लिए कहा गया। 

केस 2- चंदौली निवासी मीना को सांस लेने में तकलीफ और पेट में दर्द की शिकायत थी। डॉक्टर को दिखाया तो जांच लिखी गई। मीना के साथ आए बेटे शुभम ने लाइन में लगकर फीस जमा किया। फिर व्यवस्था के तहत काउंटर पर लाइन लगाकर पंजीकरण करवाया। शुभम ने बताया कि दोनों काउंटर के बाद किसी तरह सैंपल देने पहुंचे। इसी पूरी प्रक्रिया में आधे घंटे लग गए।
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